संयुक्त राष्ट्र अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाने में नाकाम: काया कालास
यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने सोमवार को कहा कि संयुक्त राष्ट्र वह काम नहीं कर रहा है, जो उसे करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि उन देशों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय कानून लागू करने की ज़रूरत है, जो क़ानून के शासन को मज़बूत करना चाहते हैं।
ओस्लो सुरक्षा सम्मेलन में काया कलास ने कहा,
“जैसा कि हमने सुना है, संयुक्त राष्ट्र उस तरह से काम नहीं कर रहा जैसा उसे करना चाहिए।” उन्होंने स्वीकार किया कि दुनिया में कई ऐसे देश हैं जो बेहतर क़ानून व्यवस्था चाहते हैं, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
कालास ने कहा,
“हम ऐसी स्थिति में हैं जहाँ हमें उन देशों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय कानून लागू करने की ज़रूरत है, जो बेहतर क़ानून के शासन के इच्छुक हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र का चार्टर बहुत अच्छा है, लेकिन जब जवाबदेही की बात आती है, तो वह कमज़ोर साबित होता है।
किसी पर निर्भर रहना आपको कमज़ोर बनाता है
काजा कलास ने यह भी कहा कि यूरोप को अपना रक्षा तंत्र स्वयं विकसित करना चाहिए, क्योंकि किसी और पर निर्भर रहना आपकी नींव को कमज़ोर कर देता है।
उन्होंने कहा,|
“हमने बड़ी मुश्किल से यह सीखा है कि किसी पर निर्भर होना आपको कमज़ोर बना देता है।” उन्होंने आगे कहा कि यूरोपीय संघ के रक्षा मंत्री अक्सर राष्ट्रीय बजट और निर्णयों का हवाला देते हैं। अगर हमारी रक्षा प्रणाली की नींव मज़बूत होगी, तो हम एक बड़े क्षेत्र की सुरक्षा कर सकते हैं।
कलास ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि लोग कहते हैं कि उन्हें एक यूरोपीय सेना की ज़रूरत है, लेकिन उनके अनुसार यह व्यावहारिक रूप से सही नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया,
“आप जानते हैं कि आपके पास एक ही सेना है, एक ही रक्षा बजट है। अगर आप पहले से ही नाटो का हिस्सा हैं, तो अलग से एक और सेना बनाने की ज़रूरत नहीं है। संकट के समय सबसे अहम चीज़ आदेश और उस पर अमल होता है। सवाल यह है कि आदेश कौन देगा और किसे देगा?”
उन्होंने कहा कि यूरोप और नाटो की दो अलग-अलग सेनाएँ रखना बेहद ख़तरनाक हो सकता है।
“इसीलिए मैं कहती हूँ कि हमें अपनी रक्षा प्रणाली को मज़बूत करना चाहिए, जो नाटो का भी हिस्सा हो। इससे नाटो को भी फ़ायदा होगा। नाटो को नज़रअंदाज़ करना सही नहीं है।”
नाटो की सैन्य रैंकिंग को लेकर कालास ने कहा कि यूरोपीय संघ ने नाटो से अनुरोध किया है कि वह सैन्य रैंकिंग और अन्य जानकारी साझा करे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि देश अलग-अलग रहकर मदद नहीं कर सकते, उन्हें आपस में सहयोग करना होगा।
उन्होंने कहा कि अगर सभी चीज़ों की जानकारी नहीं है, तो उसे हासिल करना ज़रूरी है।
“सभी सदस्यों को एक-दूसरे के साथ जानकारी साझा करने के लिए तैयार होना होगा। अगर आप तुर्की के बारे में सोचें और हम कुछ यूरोपीय संघ के सदस्यों के बारे में सोचें, तो हमें इन बाधाओं से बाहर निकलना होगा। हमें वास्तव में एक-दूसरे को जानकारी देनी होगी, ताकि हम यूरोपीय संघ और नाटो—दोनों की मदद कर सकें।”


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