निकारागुआ ने इज़रायल के साथ अपने राजनयिक संबंध समाप्त किए

निकारागुआ ने इज़रायल के साथ अपने राजनयिक संबंध समाप्त किए

निकारागुआ ने इज़रायली शासन के साथ अपने राजनयिक संबंधों को समाप्त करने का फैसला किया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी खबर माना जा रहा है। निकारागुआ सरकार ने एक सख्त बयान जारी करते हुए इज़रायली शासन को “फासीवादी” और “नरसंहारक” करार दिया और फिलिस्तीनियों के खिलाफ इज़रायल द्वारा की जा रही हिंसक कार्रवाइयों की निंदा की।

निकारागुआ के उपराष्ट्रपति ने इस संबंध में एक आधिकारिक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि इज़रायल के द्वारा फिलिस्तीनी जनता पर किए जा रहे हमलों के कारण यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि इन हमलों ने अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को गंभीर रूप से खतरे में डाल दिया है और इज़रायल की आक्रामकता न केवल फिलिस्तीनियों के खिलाफ है, बल्कि यह पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता फैला रही है।

इस फैसले से पहले, निकरागुआ की कांग्रेस, जो देश की विधायी संस्था है, ने एक प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें सरकार से आग्रह किया गया था कि वह ग़ाज़ा युद्ध की वर्षगांठ के मौके पर इज़रायल के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाए। इस प्रस्ताव में इज़रायली सेना द्वारा फिलिस्तीनियों पर किए जा रहे अत्याचारों को रोके जाने की मांग की गई थी और निकरागुआ की सरकार से अपील की गई थी कि वह अपने राजनयिक संबंधों पर पुनर्विचार करे।

निकारागुआ सरकार ने अपने बयान में यह भी कहा कि, इज़रायल और फिलिस्तीन के बीच का यह संघर्ष अब केवल ग़ाज़ा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह लेबनान के पार पहुंच गया है और अन्य देशों जैसे सीरिया, यमन और ईरान को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। निकरागुआ ने इन स्थितियों को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बताया और कहा कि इस समय एकजुट होकर इज़रायल की आक्रामकता के खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है।

निकारागुआ का ऐतिहासिक क़दम
निकारागुआ हमेशा से फिलिस्तीन के समर्थन में खड़ा रहा है और उसका यह निर्णय भी इसी कड़ी का हिस्सा है। निकरागुआ ने वर्षों से इज़रायल की नीतियों और फिलिस्तीनियों पर अत्याचार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज उठाई है। यह निर्णय उसी नीति का विस्तार है, जहां निकरागुआ फिलिस्तीन की स्वतंत्रता और उनके अधिकारों की वकालत करता रहा है। इज़रायल और फिलिस्तीन के बीच बढ़ते तनाव के बीच निकरागुआ का यह कदम अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।

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