महाराष्ट्र ने एक मुस्लिम-दोस्त नेता और धर्मनिरपेक्ष राजनेता खो दिया: अबू आज़मी

महाराष्ट्र ने एक मुस्लिम-दोस्त नेता और धर्मनिरपेक्ष राजनेता खो दिया: अबू आज़मी

बारामती में बुधवार सुबह हुए एक विमान हादसे में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अध्यक्ष और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन हो गया। उनकी आकस्मिक मृत्यु से राज्य की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है। विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय और अल्पसंख्यक नेताओं ने इसे महाराष्ट्र के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।

अजित पवार के निधन पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और विधायक अबू आसिम आज़मी ने गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह हादसा महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक बड़ा नुकसान है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और विधायक अबू आसिम आज़मी, जो इस समय सऊदी अरब में हैं, ने एक शोक संदेश जारी कर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अचानक हुई मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि इस हादसे से महाराष्ट्र की राजनीति को अपूरणीय क्षति हुई है।

महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री मोहम्मद आरिफ नसीम खान ने अजित पवार को एक दूरदर्शी, संवेदनशील और धर्मनिरपेक्ष नेता बताया। उन्होंने कहा कि एनडीए के साथ राजनीतिक गठबंधन के बावजूद अजित पवार ने अपनी धर्मनिरपेक्ष सोच से कभी समझौता नहीं किया। नसीम खान ने यह भी याद किया कि वर्ष 2014 में मुसलमानों के लिए शिक्षा और सरकारी नौकरियों में पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण के प्रस्ताव का सबसे पहले समर्थन अजित पवार ने ही किया था।

विधायक अमीन पटेल ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि अजित पवार हर समाज, धर्म और विचारधारा को साथ लेकर चलने वाले नेता थे। उनकी पकड़ ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में समान रूप से मजबूत थी। उनके जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भरना आसान नहीं होगा।

समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने कहा कि यह केवल महाराष्ट्र का ही नहीं, बल्कि राज्य के मुसलमानों का भी बड़ा नुकसान है। उन्होंने बताया कि अजित पवार ने अल्पसंख्यकों के लिए अलग निदेशालय की स्थापना, उर्दू भवन के निर्माण और उर्दू अकादमी को आर्थिक सहायता देने में अहम भूमिका निभाई।

पूर्व सांसद और मंत्री हुसैन दलवाई ने अजित पवार को एक कुशल प्रशासक बताते हुए कहा कि वे भाजपा के साथ गठबंधन में रहने के बावजूद धर्मनिरपेक्षता और अल्पसंख्यकों के हितों पर डटे रहे। वे साफगोई के लिए जाने जाते थे और संभव-असंभव को स्पष्ट शब्दों में बताते थे।

मौलाना आज़ाद वित्तीय निगम के निदेशक सलीम सारंग ने कहा कि अल्पसंख्यक छात्रों के लिए विदेश में पेशेवर शिक्षा हेतु बिना ब्याज ऋण योजना अजित पवार की दूरदृष्टि का परिणाम थी। उन्होंने हमेशा अल्पसंख्यकों को भरोसा दिलाया कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है।

एनसीपी (अजित) अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष मुख़लिस शेख ने कहा कि अजित पवार एक निडर, अल्पसंख्यक-दोस्त नेता थे, जो आम आदमी की समस्याओं को प्राथमिकता देते थे। यह उल्लेखनीय है कि भाजपा और शिंदे सेना के साथ गठबंधन के बावजूद उन्होंने आरएसएस से दूरी बनाए रखी और स्वयं को शाहू, फुले और आंबेडकर की विचारधारा से जुड़ा बताया।

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