डॉलर के वर्चस्व से निपटने के लिए यूरोप की रणनीति; और मैक्रों का संदेश

डॉलर के वर्चस्व से निपटने के लिए यूरोप की रणनीति; और मैक्रों का संदेश

फ्रांस के राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा है कि अमेरिकी सरकार की नीतियां, खासकर डिजिटल कानूनों, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में, आने वाले महीनों में यूरोप के लिए फिर एक गंभीर चुनौती बन सकती हैं।

9 फरवरी 2026 को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कई प्रतिष्ठित यूरोपीय अखबारों को दिए गए साक्षात्कार में कहा कि यूरोप को अमेरिका और चीन की ओर से पड़ रहे आर्थिक और राजनीतिक दबावों के सामने अधिक दृढ़ रुख अपनाना चाहिए। यह बातचीत Le Monde, Financial Times, The Economist और अन्य मीडिया संस्थानों में प्रकाशित हुई। इसमें अर्थव्यवस्था, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, अमेरिकी डॉलर की भूमिका और यूरोप की रणनीतियों पर विशेष रूप से चर्चा की गई और महाद्वीप के आर्थिक भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दिए गए।

जब पत्रकार ने पूछा कि यूरोप को अमेरिका के साथ अपने संबंधों को कैसे देखना चाहिए और क्या उसे समझौते की नीति अपनानी चाहिए या टकराव की, तो मैक्रों ने जवाब दिया कि वाशिंगटन के साथ चल रहे तनाव बनावटी या अस्थायी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि यह मान लेना गलत होगा कि ग्रीनलैंड या व्यापार से जुड़े पुराने विवाद पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिकी सरकार की नीतियां, विशेषकर डिजिटल नियमों, व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में, आने वाले महीनों में फिर से यूरोप के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं।

मैक्रों ने इस दौर को, जिसे उन्होंने “ग्रीनलैंड का क्षण” कहा, यूरोप के लिए चेतावनी के रूप में बताया। उनका कहना था कि यूरोप सिर्फ समझौते के सहारे अपनी समस्याएं हल होने की उम्मीद नहीं कर सकता, क्योंकि यह रणनीति व्यवहार में सफल नहीं रही है। उन्होंने कहा, “जब कोई स्पष्ट रूप से शत्रुतापूर्ण कदम उठाया जाता है, तो हमें झुकना नहीं चाहिए या केवल किसी समझौते तक पहुंचने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। हमने महीनों तक यह रणनीति अपनाई, लेकिन इसका परिणाम नहीं निकला।”

ये बयान यूरोप-अमेरिका संबंधों की दिशा को लेकर मैक्रों की गहरी चिंता को दर्शाते हैं, खासकर उस संदर्भ में जब बात वैश्विक अर्थव्यवस्था में डॉलर की भूमिका और यूरोपीय संघ की आर्थिक निर्भरता की आती है।

साक्षात्कार के एक अन्य हिस्से में जब पूछा गया कि क्या यूरोप अमेरिकी डॉलर से टकराव किए बिना अपनी आर्थिक स्वतंत्रता बनाए रख सकता है, तो मैक्रों ने कहा, “एक मजबूत यूरोपीय वित्तीय बाजार और साझा यूरोपीय बांड का निर्माण ही डॉलर के वर्चस्व का मुकाबला करने का एकमात्र रास्ता है, और इसे आंतरिक सहयोग तथा समन्वित आर्थिक नीतियों के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता यूरोप की वैश्विक बाजार में शक्ति को सीमित करती है। यदि यूरोप डॉलर का कोई प्रभावी विकल्प विकसित नहीं करता, तो उसकी सभी रणनीतिक परियोजनाएं और बड़े निवेश पीछे छूट सकते हैं। यूरोप में आर्थिक सुधारों के संदर्भ में मैक्रों ने कहा, “यूरोप को अपनी अर्थव्यवस्था को अधिक मजबूत बनाना होगा ताकि वह अमेरिका और चीन की आर्थिक नीतियों, व्यापारिक नियमों और तकनीकी दबावों का सामना कर सके।”

इन सुधारों में यूरोपीय साझा बाजार को मजबूत करना, आंतरिक बाधाओं को कम करना, निवेश बढ़ाना और उत्पादकता में सुधार शामिल है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष लगभग 1.2 ट्रिलियन यूरो का भारी निवेश हरित ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आवश्यक है। अन्यथा, यूरोपीय संघ के आर्थिक और सुरक्षा भविष्य के लिए बड़ा जोखिम खड़ा हो सकता है।

जब पूछा गया कि यूरोप अमेरिका और चीन से अपनी आर्थिक स्वतंत्रता कैसे बढ़ा सकता है, तो मैक्रों ने कहा कि यूरोपीय ब्लॉक को अपने आंतरिक बाजार को इतना मजबूत करना होगा कि यूरोपीय कंपनियां वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिक सकें। साथ ही वित्तीय नियमों को सरल बनाना होगा ताकि निवेश को बढ़ावा मिले और व्यापारिक नेटवर्क का विस्तार करना होगा, जिससे एक या दो बड़ी शक्तियों पर निर्भरता कम हो सके।

उन्होंने अंत में कहा, “यूरोप को केवल घरेलू उत्पादन के समर्थन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वैश्विक बाजार के अवसरों का लाभ उठाते हुए अपनी स्वतंत्र आर्थिक पहचान को मजबूत करना चाहिए।”

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए IscPress उत्तरदायी नहीं है।

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