हम इज़रायल के सामने डटकर खड़े रहेंगे और उसे बाहर निकालेंगे: हिज़्बुल्लाह महासचिव
लेबनान के हिज़्बुल्लाह के महासचिव ने कहा कि पश्चिमी देशों और अमेरिका ने लेबनानी सरकार पर प्रतिरोध को निरस्त्र करने के लिए भारी दबाव डाला، लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो सका। नईम क़ासिम ने सोमवार को कहा कि अमेरिका और इज़रायल लेबनान के सामने सबसे बड़ी समस्या हैं। उन्होंने कहा कि लेबनान एक बेहद महत्वपूर्ण देश है، क्योंकि उसने अपनी स्वतंत्रता को बनाए रखा है और अपनी ज़मीन को इज़रायल के क़ब्ज़े से मुक्त कराया है।
उन्होंने लेबनान मेडिकल सेंटर के उद्घाटन समारोह में कहा कि अमेरिका और इज़रायल लेबनान की क्षमताओं और संसाधनों पर लालच की नज़र रखे हुए हैं। इज़रायल अपने विस्तारवादी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए लेबनान की प्रगति और उसके विकल्पों को नष्ट करने की कीमत पर बल प्रयोग، क़ब्ज़ा، अपराध और नरसंहार का सहारा ले रहा है।
आत्मसमर्पण लेबनान को स्वतंत्र देशों के नक्शे से मिटा देगा
हिज़्बुल्लाह के महासचिव ने ज़ोर देकर कहा कि प्रतिरोध आंदोलन और उसका जनाधार पिछले 42 वर्षों से लेबनान की रक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा कि “इज़रायल” की परियोजना भले ही न रुके، लेकिन हमारी इच्छाशक्ति भी कभी नहीं रुकेगी और न ही कमजोर पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि ताकतवर बनना ही लेबनान की समस्याओं का एकमात्र समाधान है और यह भी जोड़ा कि अमेरिका विभिन्न तरीकों से “औला अल‑बअस” की लड़ाई के बाद लेबनान की क्षमताओं और उसके प्रतिरोध को नष्ट करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब 15 महीनों से लेबनान के खिलाफ हमले जारी हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी तरह की पीछे हटने، हार या आत्मसमर्पण से लेबनान स्वतंत्र देशों के नक्शे से बाहर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि डटे रहने से हार की कोई जगह नहीं रहती और रक्षा के लिए तैयार रहने से इज़रायल अपने लक्ष्यों तक नहीं पहुँच पाएगा।
नईम क़ासिम ने कहा कि, इज़रायल द्वारा हमलों को जारी रखने का उद्देश्य प्रतिरोध को समाप्त करना है। उन्होंने बताया कि दुश्मनों ने हिज़्बुल्लाह और लेबनानी सेना के बीच फूट डालने की कोशिश की، लेकिन दोनों पक्षों की जागरूकता ने इस साज़िश को शुरुआत में ही नाकाम कर दिया। उन्होंने कहा कि, इस समय भी लेबनान में हथियारों को केवल सरकार तक सीमित करने के बहाने पुनर्निर्माण कार्य को रोका जा रहा है।
दक्षिण लेबनान में आज सुबह इज़रायली सेना के हमले का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इज़रायली सेना के एक पैदल दस्ते ने “अल‑हबारिया” कस्बे में घुसकर हस्बाया और मरजायून क्षेत्रों में “जमाअत‑ए‑इस्लामी” के एक ज़िम्मेदार व्यक्ति को उसके घर से अगवा किया और लोगों की आँखों के सामने उस जगह को ध्वस्त कर दिया।
उन्होंने कहा कि इन कार्रवाइयों का मक़सद हर उस उपस्थिति، शक्ति या धारा को खत्म करना है जो इज़रायल को “न” कहती है या लेबनान के पुनर्निर्माण में मदद कर सकती है।
हिज़्बुल्लाह और लेबनानी सरकार का लक्ष्य इज़रायल को बाहर निकालना है
हिज़्बुल्लाह के महासचिव ने कहा कि विदेशी देश लेबनान के राष्ट्रपति पर दबाव डाल रहे हैं ताकि ऐसे कदम उठवाए जाएँ जिनसे राष्ट्रपति कार्यालय और हिज़्बुल्लाह तथा उसके समर्थकों के बीच दरार पैदा हो।
उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दों पर विचारों में मतभेद हो सकते हैं، लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दोनों पक्ष हमलों को रोकने और लेबनान को आज़ाद कराने के पक्ष में हैं। हम में से कोई भी फूट नहीं चाहता، बल्कि लेबनान के पुनर्जीवन की इच्छा रखता है।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि,
सरकार، सेना، जनता और प्रतिरोध के बीच राष्ट्रीय एकता और सहयोग ही लेबनान का भविष्य तय करेगा। अंत में उन्होंने कहा कि हमें दो लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करना होगा:
1- इज़रायली हमलों को रोकना
2- लेबनान को वित्तीय، आर्थिक और सामाजिक संकट से बाहर निकालना।


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