अमेरिकी सीनेटर का जेडी वेंस पर तंज: हमें दिखावटी नहीं, गंभीर बातचीत चाहिए

अमेरिकी सीनेटर का जेडी वेंस पर तंज: हमें दिखावटी नहीं, गंभीर बातचीत चाहिए

एंडी किम: क्या वेंस को लगा था कि वह ईरान के साथ दशकों पुराने मतभेदों को सिर्फ एक दिन में सुलझा सकता है? उन्होंने फरवरी महीने में केवल 5 दिन शीतकालीन ओलंपिक खेलों में घूमने-फिरने में बिताए।कूटनीति के लिए बड़े स्तर की योजना, तकनीकी विशेषज्ञता और लगातार संवाद की जरूरत होती है, खासकर युद्ध के समय।

हमारे सैनिक, जो खतरे में हैं, और वे अमेरिकी नागरिक जो पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं, गंभीर बातचीत के हकदार हैं—न कि उस तरह की दिखावटी बातचीत के, जो हमने देखी।

किम के अनुसार, कूटनीति केवल बयानबाज़ी से नहीं चलती—इसके लिए ठोस रणनीति, तकनीकी समझ और निरंतर संवाद की जरूरत होती है, खासकर तब जब हालात युद्ध जैसे हों। उन्होंने कहा कि खतरे में मौजूद अमेरिकी सैनिकों और महंगाई, खासकर पेट्रोल की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे नागरिकों को गंभीर और जिम्मेदार कूटनीति का अधिकार है, न कि दिखावटी वार्ताओं का।

अमेरिकी विशेषज्ञ: मज़बूत हो चुका ईरान, हमारी शर्तें क्यों मानेगा?

शिकागो विश्वविद्यालय के राजनीतिक विज्ञान के प्रोफेसर और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ रॉबर्ट ए. पेप ने पाकिस्तान में हुई वार्ता की विफलता का कारण अमेरिका की अत्यधिक मांगों को बताया। उनके अनुसार, अमेरिका ने ईरान से अपने सभी समृद्ध यूरेनियम को सौंपने की वही पुरानी मांग दोहराई, जो युद्ध से पहले भी की गई थी।

उन्होंने एक्स (X) पर लिखा: “संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान से अपने सभी समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम को सौंपने की मांग की—वही मांग जो युद्ध से पहले भी की गई थी। अब जब ईरान और अधिक शक्तिशाली हो गया है, तो वह इसे क्यों स्वीकार करेगा? मजबूत सबूत हैं कि अमेरिका खुद तनाव बढ़ाने के जाल में फंस गया है।”

पेप ने तर्क दिया कि अब जब ईरान पहले से अधिक मजबूत हो चुका है, तो यह अपेक्षा करना अव्यावहारिक है कि वह ऐसी शर्तें मान लेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मजबूत संकेत मिलते हैं कि अमेरिका खुद ही तनाव बढ़ाने के जाल में फंस गया है। इससे पहले भी पेप यह दावा कर चुके हैं कि ईरान वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख शक्ति केंद्र बनकर उभरा है, और हालिया घटनाक्रमों को उन्होंने वियतनाम युद्ध के बाद अमेरिका की सबसे बड़ी रणनीतिक विफलताओं में से एक बताया है।

शिकागो विश्वविद्यालय के इस प्रोफेसर का यह नया बयान ऐसे समय में आया है जब उन्होंने इससे पहले अमेरिका और इज़राइल के साथ युद्ध से जुड़े घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कहा था कि ईरान दुनिया का चौथा शक्ति केंद्र बन गया है। पेप ने यह भी कहा था कि ईरान ने “वियतनाम युद्ध के बाद अमेरिका की सबसे बड़ी हार” को जन्म दिया।

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