मीनाब के स्कूल को अमेरिकी लड़ाकू विमान ने निशाना बनाया: अराक़ची 

मीनाब के स्कूल को अमेरिकी लड़ाकू विमान ने निशाना बनाया: अराक़ची 

 ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने NBC को दिए गए एक इंटरव्यू में बड़ा खुलासा किया है। इंटरव्यू में पूछे गए प्रश्न और उत्तर का विस्तृत ब्यौरा हम नीचे पेश कर रहे हैं।

एंकर: NBC की रिपोर्ट कहती है कि ईरान को अमेरिकी सैनिकों की पहचान करने में रूस से मदद मिल रही है। क्या आपको ऐसी कोई मदद मिलती है?

अराकची: हमारा रूस के साथ एक रणनीतिक साझेदारी (स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप) है।

एंकर: यानी आपका जवाब “हाँ” है?

अराकची: ईरान और रूस के बीच सैन्य सहयोग कोई नई बात नहीं है और यह कभी छिपा भी नहीं रहा। यह सहयोग पहले भी था, अभी भी है और भविष्य में भी जारी रहेगा।

एंकर: क्या रूस आपको अमेरिकी सैनिकों की पहचान करने में मदद करता है?

अराकची: मेरे पास सटीक सैन्य जानकारी नहीं है। लेकिन जहाँ तक मुझे पता है, हमारा रूस के साथ बहुत अच्छा सहयोग है।

एंकर: यानी वे आपको जानकारी देते हैं?

अराकची: वे हमें विभिन्न क्षेत्रों में मदद करते हैं। मेरे पास इसके सटीक विवरण नहीं हैं।

एंकर: ट्रंप ने कहा है कि दक्षिणी ईरान के एक स्कूल पर हुए हमले के लिए ईरान खुद जिम्मेदार है। इस पर आपका क्या जवाब है।

अराक़ची: यह बात सच में हँसी-मजाक जैसी है। वह स्कूल हमारा है और वे छात्र हमारे ही बच्चे थे। उन्हें एक अमेरिकी लड़ाकू विमान ने निशाना बनाकर मार डाला। ऐसे में ईरान कैसे जिम्मेदार हो सकता है? क्या हमने यह युद्ध शुरू किया था? क्या हमने अपने ही लोगों पर हमला किया है? नहीं। हम उस समय अमेरिका के साथ बातचीत कर रहे थे और ठीक वार्ता व कूटनीति के बीच उन्होंने हम पर हमला करने का फैसला किया। उन्होंने स्कूलों और अस्पतालों सहित कई जगहों पर हमला किया है और काफी सबूत मौजूद हैं जो दिखाते हैं कि इस स्कूल को एक अमेरिकी लड़ाकू विमान ने निशाना बनाया।

एंकर: इस दावे के समर्थन में ईरान के पास क्या सबूत हैं?

अराक़ची: अगर अमेरिका नहीं था तो फिर कौन था? शायद इज़राइल। लेकिन यह स्पष्ट है कि हम पर हमला कौन कर रहा है।

एंकर: आपने अमेरिकी जमीनी सैनिकों के बारे में कहा था कि “हम उनका इंतज़ार कर रहे हैं।” लेकिन ट्रंप का कहना है कि सैनिक तभी भेजे जाएंगे जब ईरान इतना कमजोर हो जाए कि जमीनी युद्ध में मुकाबला न कर सके। क्या वह सही कह रहे हैं?

अराक़ची: हमारे पास अपनी रक्षा करने की पूरी क्षमता है। हमारे पास बहुत बहादुर सैनिक हैं, जो किसी भी दुश्मन के खिलाफ लड़ने और उसे हराने के लिए तैयार हैं, अगर वह हमारी जमीन में घुसता है। यह स्थिति आने वाले दिनों में, आने वाले वर्षों में और हमेशा ईरान में बनी रहेगी। हम एक बहादुर जनता हैं, हमारी सभ्यता बहुत महान है और हमने हजारों वर्षों से अपनी धरती की रक्षा की है और जितनी आवश्यकता होगी उतना आगे भी करते रहेंगे।

एंकर: ट्रंप ने कहा कि इस युद्ध की शुरुआत का एक कारण यह भी था कि ईरान के पास ऐसे मिसाइल हैं जो यूरोप और अमेरिका के ठिकानों को निशाना बना सकते हैं और जल्द ही अमेरिका की धरती तक भी पहुंच सकते हैं। क्या ईरान का अमेरिका पर सीधे हमला करने का इरादा था?

अराक़ची: यह दावा सही नहीं है और वास्तव में गलत जानकारी है। हमारे पास मिसाइल बनाने की क्षमता है, लेकिन हमने जानबूझकर अपनी मिसाइलों की मारक दूरी 2000 किलोमीटर से कम रखी है, ताकि इसे दूसरों के लिए खतरे के रूप में न देखा जाए। हमने मौजूदा सीमा से अधिक दूरी वाली मिसाइलों के विकास का कोई कार्यक्रम शुरू नहीं किया है। इसलिए ऐसा कोई सबूत या जानकारी नहीं है जो दिखाए कि ईरान लंबी दूरी की मिसाइलें विकसित कर रहा है, खासकर ऐसी मिसाइलें जो अमेरिका तक पहुंच सकें।

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