‘हमास’ को ख़त्म करने के लिए सालों तक लड़ना होगा: इज़रायली विश्लेषक

‘हमास’ को ख़त्म करने के लिए सालों तक लड़ना होगा: इज़रायली विश्लेषक

ग़ाज़ा से आ रही ज़मीनी रिपोर्टों और इज़रायली सेना के आकलनों से यह साफ़ होता है कि, यह जंग अब एक बेमतलब और थकाऊ दौर में दाख़िल हो चुकी है। वहीं अमेरिकी यात्रा के दौरान यह बात भी खुलकर सामने आई कि वॉशिंगटन इस जंग को नाकाम मान चुका है और नेतन्याहू पर सीधा दबाव डाल रहा है कि, वह युद्ध-विराम को स्वीकार करे। लेकिन नेतन्याहू की बयानबाज़ी से साफ़ है कि वह किसी समझौते को लेकर जल्दबाज़ी में नहीं है, क्योंकि इज़रायल के अंदर इस समझौते को नेतन्याहू की हार और राजनीतिक अंत के रूप में देखा जा सकता है।

इज़रायली मीडिया के विश्लेषणों में भी यही बात दोहराई गई है कि ग़ाज़ा में हमास की सत्ता को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य सेना से पूरा नहीं हो पाया है। सेना की रिपोर्टों और लीक दस्तावेज़ों से पता चलता है कि हमास की जड़ें बहुत गहरी और जटिल हैं, और उन्हें मिटाने के लिए कई सालों की थकाऊ जमीनी लड़ाई की ज़रूरत होगी।

सेना अभी भी हमास की सुरंगों से पैदा हो रहे ख़तरों और उन्हें पूरी तरह खत्म करने में आने वाली मुश्किलों को लेकर उलझन में है। यदि सेना पीछे हटती है तो हमास को दोबारा ताकत बटोरने का मौका मिल सकता है। वहीं, इज़रायली बंधकों का समय तेज़ी से निकल रहा है और जंग का जारी रहना उनकी जान को और अधिक ख़तरे में डाल रहा है।

इज़रायली विश्लेषकों का कहना है कि यह जंग अब अपना मक़सद और दिशा दोनों खो चुकी है, और अब केवल जानें ले रही है। अगर जंग के शुरूआती मक़सद पूरे करने भी हैं, तो वो बहुत लंबी, महंगी और थकाऊ जंग के बाद ही मुमकिन हैं।

अख़बार यदिओत अहरोनोत की ग्राउंड रिपोर्ट में बताया गया है कि ग़ाज़ा में तैनात इज़रायली जवान सुरंगों के एक ऐसे नेटवर्क से लड़ रहे हैं जिसे ‘सीज़ीफ़ी मिशन’ यानी अंतहीन और थकाऊ लड़ाई कहा जा रहा है। ग्रेनाइट बटालियन के कमांडर ने बताया कि “हम ज़मीन पर तो कुछ ही मिनट में समुद्र तक पहुँच सकते हैं, लेकिन हमारे पैरों के नीचे एक छिपा हुआ शहर है, जिसे साफ़ करने के लिए हमें समय, सटीक योजना और खास उपकरण चाहिए, और ये सब कुछ हमारे पास नहीं है।”

वहीं, जवानों ने इस मिशन में भारी दिक्कतों की बात कही है, जैसे खुदाई के उपकरणों की कमी, बारूद की सप्लाई में मुश्किलें और हमास की लगातार बदलती रणनीति। सेना का मानना है कि एक किलोमीटर सुरंग को साफ़ करने में हफ्तों लग सकते हैं, वो भी तब जब हर वक्त घात, मौत या बंधक बनाए जाने का ख़तरा हो।

विश्लेषक ‘युसी याहुशुआ’ ने चेतावनी देते हुए कहा कि,  भले ही युद्ध-विराम का कोई समझौता हो जाए, तब भी सुरंगों का खतरा बना रहेगा। हमास इन सुरंगों को फिर खोल सकता है या नई सुरंगें बना सकता है। यह नेटवर्क हमेशा एक बड़ा खतरा रहेगा – चाहे हमले के लिए हो या बंधक बनाने के लिए। उन्होंने यह भी बताया कि हमास अब इज़रायली सेना से छीने गए हथियारों से देसी बम बना रहा है। उन्होंने कहा कि अगर इज़रायल कुछ इलाकों से पीछे हटता है, तो हमास फिर से अपनी सैन्य ताक़त बहाल कर लेगा।

अंत में, उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा: “हमास को खत्म करना एक ऐसा लक्ष्य है जो सिर्फ़ सालों लंबी और भयंकर लड़ाई से ही हासिल हो सकता है। जो कोई भी इसके उलट सोचता है, वो इस संकट की गहराई को नहीं समझता।” उनका आख़िरी अलर्ट था: “ग़ाज़ा के पास समय है, और यही समय उसका सबसे बड़ा हथियार है।”

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