क्षेत्र में सुरक्षा और शांति या तो सबके लिए होगी, या किसी के लिए नहीं:अली ख़ामेनेई के सलाहकार

क्षेत्र में सुरक्षा और शांति या तो सबके लिए होगी, या किसी के लिए नहीं:अली ख़ामेनेई के सलाहकार

ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार और सहायक मोहम्मद मुख़बर ने फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी से बातचीत में क्षेत्र में हालिया घटनाक्रमों की सुरक्षा, आर्थिक और भू-राजनीतिक पहलुओं की व्याख्या करते हुए, संयुक्त राज्य अमेरिका की सैन्य गतिविधियों और दावों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने फ़ार्स की खाड़ी और रणनीतिक समुद्री मार्गों में स्थिरता सुनिश्चित करने में ईरान की निर्णायक भूमिका पर ज़ोर देते हुए कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा एक अविभाज्य अवधारणा है और इसे चयनात्मक रूप से परिभाषित नहीं किया जा सकता। मुख़बर ने क्षेत्र से बाहर की ताक़तों की साहसिक कार्रवाइयों के परिणामों के प्रति चेतावनी देते हुए कहा कि विदेशी खिलाड़ियों के सामने विकल्प साफ है:
या तो विवेक और सहयोग का रास्ता अपनाएँ, या तनाव बढ़ाकर उसके परिणाम स्वीकार करें।

मुख़बर का पूरा साक्षात्कार

प्रश्न: डॉ. मुख़बर, हालिया अमेरिकी सैन्य गतिविधियों और उस देश के राष्ट्रपति के बयानों को देखते हुए, आप इस नीति के क्षेत्रीय सुरक्षा पर लक्ष्यों और प्रभावों का कैसे मूल्यांकन करते हैं?

उत्तर: बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम।

सबसे पहले, मैं ईरान की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के एक मूल सिद्धांत पर ज़ोर देना चाहता हूँ: ईरान एक शांति-प्रिय और स्थिरता-निर्माता राष्ट्र है, लेकिन राष्ट्रीय संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अपने वैध हितों की रक्षा में हम पूरी ताक़त के साथ, ईश्वर पर भरोसा, जनता की दृढ़ इच्छाशक्ति और अपनी रक्षा क्षमता के सहारे डटे हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति की भाषा और बयान न केवल ईरान के संकल्प को कमज़ोर नहीं करते, बल्कि यह दर्शाते हैं कि उन्हें इस क्षेत्र की सुरक्षा और आर्थिक जटिलताओं की सतही और ग़लत समझ है।

प्रश्न: पिछले दशकों में फ़ार्स की खाड़ी, होर्मुज़ जलडमरूमध्य और ओमान सागर की सुरक्षा किसी बाहरी शक्ति की मौजूदगी से नहीं, बल्कि ईरान जैसे संप्रभु और ज़िम्मेदार देशों की भूमिका से सुनिश्चित हुई है, जिन्होंने साझा हितों की आपसी जुड़ाव को समझते हुए स्थिरता का मार्ग अपनाया।फ़ार्स की खाड़ी और ओमान सागर की समीकरणों में ईरान निर्णायक खिलाड़ी है। इस संदर्भ में, इन जलमार्गों के रणनीतिक महत्व और ईरान की भूमिका को आप कैसे देखते हैं?

उत्तर: इस विषय को सही ढंग से समझने के लिए ईरान की भौगोलिक और आर्थिक विशिष्टता को देखना होगा।
ईरान के पास फ़ारस की खाड़ी और ओमान सागर के किनारे दो हज़ार किलोमीटर से अधिक समुद्री सीमा है। साथ ही उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम परिवहन गलियारों में उसकी अहम भूमिका है।इसलिए ईरान केवल एक निष्क्रिय दर्शक नहीं, बल्कि इस क्षेत्र का मुख्य हितधारक और निर्णायक खिलाड़ी है। यह स्थिति एक ऐतिहासिक और ईश्वरीय उपहार है, जिसने ईरान को वैश्विक ऊर्जा उत्पादन और व्यापार के केंद्र में ला खड़ा किया है। लेकिन हमारा दृष्टिकोण केवल राष्ट्रीय हित तक सीमित नहीं है। हम मानते हैं कि यह स्थान हमें क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक सुरक्षित और स्थिर मंच बनाने की बड़ी ज़िम्मेदारी देता है। दुनिया की ऊर्जा का धड़कता दिल शांति चाहता है, और ईरान हमेशा इस शांति का संरक्षक रहा है। दूसरों के लिए संकट पैदा करके कोई अपनी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकता

प्रश्न: कुछ देश अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। इसका सामूहिक सुरक्षा पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

उत्तर: हमारा मूल सिद्धांत स्पष्ट है:
क्षेत्र में सुरक्षा और शांति या तो सबके लिए होगी, या किसी के लिए नहीं। यह कोई नारा नहीं, बल्कि एक अटल भू-राजनीतिक सच्चाई है। आप अपने लिए पूर्ण सुरक्षा नहीं बना सकते और साथ-साथ दूसरों के लिए संकट खड़ा कर दें। असुरक्षा की आग का धुआँ अंततः सबकी आँखों में जाएगा। हम आशा करते हैं कि कुछ बाहरी देश संकीर्ण और एकतरफ़ा सोच न अपनाएँ, मानो वे अन्य देशों के महत्वपूर्ण सुरक्षा और आर्थिक हितों से बेपरवाह हों। इतिहास ने साबित किया है कि ऐसी नीतियाँ केवल तनाव बढ़ाती हैं, अविश्वास पैदा करती हैं और अप्रत्याशित प्रतिक्रियाओं की श्रृंखला को जन्म देती हैं।

प्रश्न: ईरान का ऊर्जा मार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था की मुख्य धमनियों में से एक है,क्या आप इस पारस्परिक निर्भरता के वैश्विक और आर्थिक आयामों को और स्पष्ट कर सकते हैं?

उत्तर: निश्चित रूप से।
हर साल लगभग 500 अरब डॉलर मूल्य की ऊर्जा और वस्तुएँ इस अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से होकर गुजरती हैं। यह केवल एक व्यापारिक रास्ता नहीं है, बल्कि पूर्वी एशिया से लेकर पश्चिमी यूरोप तक दर्जनों राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं की जीवनरेखा है।

इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा का अर्थ है:

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान,

कीमतों में वृद्धि,

आर्थिक मंदी

और दुनिया के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक अशांति।

स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और सभी हितधारक देश इस व्यापारिक प्रवाह में तनाव या रुकावट से प्रसन्न नहीं होंगे। स्वाभाविक है कि वे अपने महत्वपूर्ण हितों की रक्षा के लिए, राजनीतिक, आर्थिक और आवश्यकता पड़ने पर समन्वित सुरक्षा कदम भी उठाएँगे।

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