ईरान में विरोध प्रदर्शन या आतंकवाद?
ईरान की जनता ने इस चुनौती के खिलाफ एकजुट होकर प्रतिक्रिया दी। 9 जनवरी को पूरे देश में लाखों लोग अपने सुप्रीम लीडर, आयतुल्लाह खामेनेई के समर्थन में सड़कों पर उतरे। यह केवल तेहरान की राजधानी तक सीमित नहीं था। देश के हर हिस्से में, चाहे वह उत्तर हो या दक्षिण, पश्चिम या पूर्व, लोग अपनी सरकार के समर्थन में दिखाई दिए। उन्होंने अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ स्पष्ट नारों के साथ यह संदेश दिया कि विदेशी ताकतों की मदद से देश में अशांति फैलाने की किसी भी कोशिश को ईरानी लोग स्वीकार नहीं करेंगे।
इस एकजुटता में ईरानी जनता ने यह भी दिखाया कि उनका देश अपने आंतरिक और बाहरी खतरों के प्रति सचेत है। सड़कों पर उतरे लोग केवल विरोध नहीं कर रहे थे, बल्कि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि देश की सुरक्षा और स्थिरता उनकी प्राथमिकता है। विरोध के नाम पर होने वाली हिंसा और आतंकवाद की हर कोशिश को पूरी तरह खारिज किया गया। यह संदेश न केवल ईरान के भीतर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भेजा गया कि ईरानी समाज आतंकवादी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेगा।
ईरान की सरकार और जनता ने इस अवसर पर यह साबित कर दिया कि वे अपने देश और नेताओं के प्रति वफादार हैं। किसी भी विदेशी शक्ति की साजिश, चाहे वह अमेरिका हो या इज़राइल, उनके राष्ट्रवाद और देशभक्ति के सामने टिक नहीं सकती। यह घटनाएँ यह स्पष्ट करती हैं कि जब कोई देश अपने नागरिकों और नेतृत्व के प्रति ईमानदार और एकजुट होता है, तो आतंकवाद और विदेशी हस्तक्षेप की कोई भी कोशिश सफल नहीं हो सकती।
अभी जो हालात सामने आए हैं, वे यह भी दिखाते हैं कि ईरान में जनता की सोच और उनकी जागरूकता बेहद मजबूत है। महंगाई या अन्य समस्याओं के खिलाफ प्रदर्शन स्वाभाविक हैं, लेकिन जब इसे भटकाकर हिंसा और आतंकवाद में बदलने की कोशिश की जाती है, तो ईरानी लोग पूरी ताकत से इसका मुकाबला करते हैं। 9 जनवरी को हुए समर्थन प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि ईरान में असली ताकत उसकी जनता है, और यह ताकत आतंकवाद और विदेशी साजिशों के सामने कभी कमजोर नहीं पड़ेगी।
इस पूरे घटनाक्रम में यह भी देखा गया कि ईरानी समाज केवल विरोध के पक्ष में नहीं था, बल्कि अपने नेताओं और देश के प्रति समर्थन दिखाने में पूरी तरह सक्रिय था। लाखों लोग सड़कों पर उतरे, और उनके नारों ने यह साफ कर दिया कि देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा के मुद्दे उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। अमेरिका और इज़राइल जैसी विदेशी ताकतें चाहे जितनी भी कोशिश करें, ईरान की जनता ने दिखा दिया कि वे देशभक्ति और अपने नेता आयतुल्लाह खामेनेई के समर्थन में हमेशा खड़े रहेंगे।
इस प्रकार, हाल की घटनाओं ने साबित कर दिया कि ईरान में जो हिंसा हुई वह केवल विरोध प्रदर्शन नहीं था। यह एक सुनियोजित आतंकवादी साजिश थी, जिसे ईरानी जनता और सरकार ने मिलकर नाकाम कर दिया। 9 जनवरी का दिन इतिहास में दर्ज हो गया, जब पूरा ईरान अपने सुप्रीम लीडर के समर्थन में एकजुट होकर सड़कों पर उतरा और आतंकवाद तथा विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ स्पष्ट संदेश दिया।
ईरान के हालात और इन बड़े जनसमर्थन ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखना जनता की प्राथमिकता है। महंगाई और अन्य आर्थिक समस्याओं के बावजूद, जनता ने दिखाया कि वे अपने देश और नेताओं के प्रति समर्पित हैं। विदेशी शक्तियों द्वारा फैलाई गई अशांति की कोशिशों को उन्होंने पूरी तरह नाकाम कर दिया। ईरान का यह दृढ़ रुख, देशभक्ति और एकता का प्रतीक है, और यह संदेश देता है कि आतंकवाद और बाहरी हस्तक्षेप के बावजूद, ईरान की जनता अपने नेताओं और अपने देश के समर्थन में हमेशा खड़ी रहेगी।
ट्रंप, ईरान में आतंकियों का समर्थन क्यों कर रहे हैं?
अब प्रश्न यह उठता है कि, अगर ईरान में अशांति फैलाने वाले प्रदर्शनकारी थे और महंगाई के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे थे तो, यह विरोध प्रदर्शन रात में आठ बजे के बाद जब दुकाने बंद हो जाती थीं, सड़कें सुनसान हो जाने के बाद ही क्यों होता था ? आतंकियों ने घरों और मस्जिदों को आग क्यों लगाया? आम और निर्दोष नागरिकों नागरिकों को मौत के घाट क्यों उतारा? तीन साल की मासूम बच्ची को गोली क्यों मारी? अस्पताल में काम करने वाली नर्स को ज़िंदा क्यों जलाया? आतंकियों के पास हथियार कहाँ से आया? सबसे अहम सवाल यह है है कि, अमेरिका और इज़रायल इस आतंकी हमले का खुलकर समर्थन क्यों कर रहे हैं? डोनाल्ड ट्रंप इन आतंकियों को जो आईएसआईएस की तरह क्रूर हमले कर रहे हैं उन्हें मदद भेजने का वादा क्यों कर रहे हैं?
डोनाल्ड ट्रंप ने खुले तौर पर इन आतंकियों को मदद देने की बात कही है, जो न केवल ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून की भी धज्जियां उड़ाता है। ट्रंप की नीति यह दर्शाती है कि वह हिंसा और अस्थिरता को बढ़ावा देने में शामिल हैं, न कि शांति और न्याय के पक्ष में हैं। अमेरिका और इज़राइल की यह रणनीति केवल क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने और निर्दोष नागरिकों की जान लेने का काम करती है।
इतिहास खुद यह दिखाता है कि बाहरी शक्तियों का किसी देश की आंतरिक अशांति में हस्तक्षेप हमेशा विनाशकारी परिणाम लेकर आता है। जब निर्दोष लोग मारे जाते हैं, घरों और मस्जिदों को आग लगाई जाती है, तब अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चुप नहीं रहना चाहिए। लेकिन अमेरिका और इज़राइल का खुले समर्थन यह साबित करता है कि उनकी प्राथमिकता मानवाधिकार या न्याय नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक और आर्थिक हित हैं।
इसलिए यह आवश्यक है कि विश्व समुदाय ईरान में हो रही हिंसा और आतंक का स्पष्ट रूप से विरोध करे। अमेरिका और इज़राइल के हस्तक्षेप के कारण न केवल ईरान बल्कि पूरी मध्य पूर्व की स्थिरता खतरे में है। डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेताओं द्वारा आतंकवाद को बढ़ावा देना मानवता के खिलाफ अपराध है। शांति और न्याय के लिए आवश्यक है कि इन शक्तियों को रोका जाए और निर्दोष नागरिकों के जीवन की रक्षा की जाए। ईरान की जनता के अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित करना केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और दुनिया के लिए जरूरी है। अमेरिका और इज़राइल का खुला समर्थन हिंसा को बढ़ावा देने वाला कदम है, जिसे हर सभ्य समाज को रोकना चाहिए।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए IscPress उत्तरदायी नहीं है।


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