इस्राईल के प्रधानमंत्री अवैध बस्तियों के लिए अमेरिका और फिलिस्तीन से लेंगे पंगा इस्राईल के प्रधानमंत्री बैनेट अपने पूर्ववर्ती नेतन्याहू से भी अधिक कट्टरवादी एंव दक्षिणपंथी विचारधारा के लिए जाने जाते हैं।
इस्राईल के प्रधानमंत्री के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री ने अपने राजनीतिक जीवन में इस बात को बार-बार स्पष्ट भी किया है कि फिलिस्तीन में जहां-जहां भी यहूदी बस्तियां हैं उन्हें स्वतंत्र इस्राईल का हिस्सा होना चाहिए।
यरूशलम पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार इस्राईली संसद नेसेट में बोलते हुए प्रधानमंत्री है नफ्ताली बैनेट ने कहा कि वह सी ज़ोन अर्थात वेस्ट बैंक में मौजूद राष्ट्रीय हितों की रक्षा की कसम खाते हैं।
यह कोई साधारण शब्द नहीं है बल्कि यह नफ्ताली मबैनेट और लैपिड की पार्टी के बीच हुए गठबंधन समझौते में लिखी हुई बात है।
इस बयान से एक बात और स्पष्ट होती है कि लेफ्ट विंग और राइट विंग दलों के बीच हुए समझौते के बाद भी अवैध आवासीय इकाइयों का निर्माण जारी रहेगा।
बैनेट ने रविवार को संसद में बात करते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी इच्छा है कि अतिगृहित फिलिस्तीन में आवासीय इकाइयों के निर्माण को और मजबूती प्रदान करें।
संयुक्त अरब लिस्ट पार्टी के सदस्य अहमद तीबी ने समझौते में मौजूद इस अंश की व्याख्या करते हुए संसद में कहा कि वह इस का अर्थ यह समझते हैं कि बैनेट अप्रवासी नीति को आगे बढ़ाने का इरादा रखते हैं।
इस से भी महत्वपूर्ण बात यह है कि बैनेट अरब देशों के साथ शांति समझौते को बनाए रखने और उनसे संबंधों में विस्तार की बात तो करते हैं लेकिन उन्होंने प्रथक फिलीस्तीन राष्ट्र का समर्थन करने की बात की है ना फिलिस्तीनियों से शांति का वादा किया है।
बैनेट एक लंबे समय से ही पृथक फिलिस्तीन राष्ट्र का विरोध करते आए हैं।