इज़रायल ने ग़ाज़ा में डॉक्टर्स विदआउट बॉर्डर्स के काम पर रोक लगाई
इज़रायल ने मंगलवार, 30 दिसंबर को घोषणा की कि उसने ग़ाज़ा में काम कर रहे सबसे बड़े और प्रसिद्ध सहायता संगठनों में से एक डॉक्टर्स विदआउट बॉर्डर्स और दो दर्जन से अधिक मानवीय संगठनों को नए पंजीकरण नियमों का पालन न करने के कारण ग़ाज़ा पट्टी में काम करने से निलंबित कर दिया है। सहायता कर्मियों का कहना है कि इस फैसले से उस नागरिक आबादी को भारी नुकसान पहुंचेगा जिसे पहले ही मानवीय सहायता की सख्त जरूरत है।
इज़रायल का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य हमास और अन्य सशस्त्र समूहों को सहायता संगठनों में घुसपैठ करने से रोकना है। लेकिन सहायता संगठनों का कहना है कि इस साल की शुरुआत में घोषित किए गए ये नए नियम मनमाने हैं।
उदाहरण के लिए, नए नियमों में वैचारिक शर्तें शामिल हैं। इनमें उन संगठनों को अयोग्य ठहराना शामिल है जिन्होंने इज़रायल के बहिष्कार की अपील की हो, 7 अक्टूबर के हमले से इनकार किया हो, या इज़रायली सैनिकों अथवा नेताओं के खिलाफ किसी भी अंतरराष्ट्रीय अदालत के मुकदमे का समर्थन किया हो।
पूरे युद्ध के दौरान इज़रायल यह दावा करता रहा है कि हमास सहायता सामग्री को हड़प लेता है, जबकि संयुक्त राष्ट्र और सहायता संगठनों ने इस आरोप से इनकार किया है। इज़रायल के विदेश मंत्रालय ने कहा कि 30 से अधिक संगठन, जो ग़ाज़ा में काम करने वाले संगठनों का लगभग 15 प्रतिशत हैं, नियमों का पालन करने में विफल रहे हैं और उनकी गतिविधियों को निलंबित कर दिया जाएगा। मंत्रालय ने यह भी कहा कि डॉक्टर्स विदआउट बॉर्डर्स इज़रायली आरोपों का जवाब देने में असफल रहा है कि उसके कुछ कर्मचारी हमास या इस्लामिक जिहाद से जुड़े थे।
डॉक्टर्स विदआउट बॉर्डर्स, जिसे उसके फ्रांसीसी संक्षेप एमएसएफ के नाम से भी जाना जाता है, ने कहा कि इज़रायल का यह फैसला ग़ाज़ा में उसके काम पर विनाशकारी प्रभाव डालेगा, जहां वह अस्पतालों के लगभग 20 प्रतिशत बिस्तरों और एक तिहाई प्रसव सेवाओं का समर्थन करता है। संगठन ने अपने कर्मचारियों के बारे में लगाए गए आरोपों का भी खंडन किया। एमएसएफ ने कहा, “हम कभी भी जानबूझकर सैन्य गतिविधियों में शामिल लोगों को नियुक्त नहीं करते।”
थका हुआ स्थानीय स्टाफ
हालांकि इज़रायल का दावा है कि इस फैसले का ज़मीन पर सीमित प्रभाव पड़ेगा, लेकिन प्रभावित संगठनों का कहना है कि समय बहुत ही विनाशकारी है, क्योंकि एक नाज़ुक युद्ध-विराम को अभी तीन महीने भी पूरे नहीं हुए हैं।
नॉर्वेजियन रिफ्यूजी काउंसिल की संचार सलाहकार शाइना लो, जिनके संगठन को भी निलंबित किया गया है, ने कहा, “युद्ध-विराम के बावजूद ग़ाज़ा में ज़रूरतें बेहद अधिक हैं, और इसके बावजूद दर्जनों अन्य संगठन जीवन बचाने के लिए आवश्यक सहायता लाने से रोके जा रहे हैं और आगे भी रोके जाएंगे।”
उन्होंने कहा,
“ग़ाज़ा में स्टाफ भेजने में असमर्थ होने का मतलब है कि सारा बोझ हमारे पहले से थके हुए स्थानीय कर्मचारियों पर आ जाता है।” नए नियमों के तहत सहायता संगठनों को ग़ाज़ा में काम जारी रखने के लिए अपने कर्मचारियों के नाम दर्ज कराने होंगे और अपनी फंडिंग तथा संचालन से जुड़ी विस्तृत जानकारी देनी होगी।
कुछ सहायता संगठनों का कहना है कि उन्होंने फ़िलिस्तीनी कर्मचारियों की सूची जमा नहीं कराई, जैसा कि इज़रायल ने मांगा था, क्योंकि उन्हें डर है कि, इज़रायल द्वारा उन्हें निशाना बनाया जा सकता है और यूरोप के डेटा संरक्षण कानूनों के कारण भी यह संभव नहीं था। लो ने कहा, “यह कानूनी और सुरक्षा दृष्टिकोण से है। ग़ाज़ा में हमने सैकड़ों सहायता कर्मियों को मारे जाते देखा है।”
सहायता संगठनों के लाइसेंस नवीनीकरण न करने के फैसले का मतलब है कि इज़रायल और पूर्वी यरुशलम में उनके कार्यालय बंद हो जाएंगे और वे ग़ाज़ा में न तो अंतरराष्ट्रीय स्टाफ भेज सकेंगे और न ही सहायता सामग्री।


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