मस्कट में ईरान-अमेरिका के बीच बहुत अच्छी बातचीत हुई: डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार तड़के ओमान की राजधानी मस्कट में ईरान और अमेरिका के बीच हुई अप्रत्यक्ष वार्ता को लेकर बयान देते हुए इसे “बहुत अच्छी” बातचीत बताया। यह पहली बार है जब ट्रंप ने इन वार्ताओं पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की है।
एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान किसी समझौते तक पहुंचने के लिए इच्छुक है। हालांकि उन्होंने अपने बयान में एक बार फिर सैन्य दबाव और नौसैनिक तैनाती का उल्लेख कर यह स्पष्ट कर दिया कि वाशिंगटन अब भी दबाव की नीति को पूरी तरह छोड़े बिना आगे बढ़ना चाहता है।
ट्रंप ने कहा कि पिछली बार ईरान ने समझौते को आगे नहीं बढ़ाया था, लेकिन इस बार उसका नजरिया बदला हुआ लग रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि संभावित समझौता पहले से अलग होगा। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक बेड़े की मौजूदगी का जिक्र कर अपनी पारंपरिक “दबाव के साथ बातचीत” वाली रणनीति दोहराई।
गौरतलब है कि ईरान और इज़रायल के बीच हालिया 12-दिवसीय संघर्ष से पहले भी ट्रंप प्रशासन बातचीत को लेकर सकारात्मक बयान देता रहा था, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई थी।
ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु मुद्दे पर यह अप्रत्यक्ष वार्ता ओमान की मध्यस्थता में शुक्रवार को शुरू हुई। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराक़ची और अमेरिका के मुख्य वार्ताकार स्टीव विटकॉफ ने अलग-अलग ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी से मुलाकात की।
अराक़ची ने अपनी पहली बैठक में ईरान की स्पष्ट और सैद्धांतिक स्थिति रखी। उन्होंने यह दोहराया कि ईरान ऐसी किसी भी वार्ता में शामिल होगा जो वास्तविक परिणाम दे, ईरान के वैध परमाणु अधिकारों को मान्यता दे और वर्षों से लगाए गए अन्यायपूर्ण व अवैध प्रतिबंधों को हटाने का रास्ता खोले।
ईरान शुरू से यह स्पष्ट करता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है और वह दबाव, धमकी या सैन्य चेतावनी के आधार पर समझौता स्वीकार नहीं करेगा। इसके विपरीत, तेहरान ने हमेशा बातचीत को समाधान का रास्ता बताया है, बशर्ते वह आपसी सम्मान और अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में हो।
हाल के दिनों में अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिए थे कि वे परमाणु मुद्दे से आगे बढ़कर मिसाइल और क्षेत्रीय मामलों को भी बातचीत में शामिल करना चाहते हैं। लेकिन मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मस्कट में हुई शुक्रवार की वार्ता केवल परमाणु मुद्दे तक ही सीमित रही, जो ईरान की उस मांग के अनुरूप है जिसमें वह गैर-परमाणु विषयों को वार्ता से बाहर रखने पर जोर देता रहा है।
कुल मिलाकर, मस्कट वार्ता में ईरान की भूमिका स्पष्ट, सुसंगत और सिद्धांतों पर आधारित दिखाई दी, जबकि अमेरिकी पक्ष अब भी बातचीत के साथ-साथ दबाव की भाषा का इस्तेमाल करता नजर आया।


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