ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के तहत हमास को दो महीने का अल्टीमेटम: इज़रायली मंत्री

ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के तहत हमास को दो महीने का अल्टीमेटम: इज़रायली मंत्री

इज़रायल के वित्त मंत्री बेज़ालेल स्मोट्रिच ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित शांति योजना के तहत गठित “बोर्ड ऑफ पीस” की ओर से हमास को दो महीने के भीतर निरस्त्र होने का अल्टीमेटम दिया जाएगा। स्मोट्रिच के अनुसार, यदि तय समय सीमा के भीतर हमास इस शर्त का पालन नहीं करता, तो न केवल ग़ाज़ा में युद्ध का अंत संभव होगा, बल्कि किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक समाधान पर आगे बढ़ना भी मुमकिन नहीं होगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इज़रायल की नीति के मुताबिक ग़ाज़ा में युद्ध तब तक समाप्त नहीं हो सकता, जब तक हमास को सैन्य, राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर पूरी तरह निष्प्रभावी न कर दिया जाए। इज़रायली वित्त मंत्री ने यह बयान एक इंटरव्यू के दौरान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि प्रस्तावित शांति योजना का केंद्रीय बिंदु यही है कि ग़ज़ा में किसी भी नए प्रशासनिक ढांचे से पहले हमास का निरस्त्रीकरण अनिवार्य है। उनके शब्दों में, “हमास के हाथों में हथियार रहते हुए किसी भी शांति या पुनर्निर्माण की बात बेमानी है।”

गौरतलब है कि “बोर्ड ऑफ पीस” की घोषणा राष्ट्रपति ट्रंप ने 15 जनवरी 2026 को ग़ज़ा से संबंधित अपने व्यापक शांति योजना के हिस्से के रूप में की थी। इस मंच का उद्देश्य ग़ाज़ा में युद्ध के बाद के राजनीतिक, सुरक्षा और प्रशासनिक ढांचे पर काम करना बताया गया है। स्मोट्रिच के अनुसार, बोर्ड ऑफ पीस के तहत प्रस्तावित योजना कई चरणों में विभाजित है। पहले चरण में युद्ध-विराम, क़ैदियों की अदला-बदली और मानवीय सहायता शामिल है, जबकि अगले चरण में हमास के हथियारों का पूर्ण उन्मूलन एक बुनियादी शर्त होगा। उन्होंने कहा कि जब तक यह शर्त पूरी नहीं होती, इज़रायल किसी स्थायी युद्ध-विराम या ग़ज़ा के पुनर्निर्माण पर सहमत नहीं होगा।

इज़रायली वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि ग़ाज़ा के पुनर्निर्माण और किसी नए प्रशासनिक तंत्र की स्थापना के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता तभी संभव होगी, जब हमास को निरस्त्र कर दिया जाए। उनके मुताबिक, कई वैश्विक साझेदार भी इस रुख का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि हथियार मौजूद होने की स्थिति में सहायता राशि के दुरुपयोग का खतरा बना रहेगा।

फिलहाल हमास की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और न ही अमेरिकी प्रशासन या बोर्ड ऑफ पीस की तरफ़ से दो महीने के अल्टीमेटम के विवरण की पुष्टि की गई है। फ़िलिस्तीनी हलकों में इस बयान को एकतरफ़ा रुख़ बताया जा रहा है, हालांकि इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब ग़ाज़ा में युद्ध-विराम एक नाज़ुक दौर से गुजर रहा है और क्षेत्र के भविष्य को लेकर कूटनीतिक गतिविधियां तेज़ हो रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, हथियार छोड़ने की शर्त आने वाले वार्ताओं में एक केंद्रीय और विवादास्पद मुद्दा बन सकती है।

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