फ्रीडम फ्लोटिला जहाज़, इज़रायली नाकेबंदी तोड़ने और बच्चों की मदद के लिए ग़ाज़ा रवाना 

फ्रीडम फ्लोटिला जहाज़, इज़रायली नाकेबंदी तोड़ने और बच्चों की मदद के लिए ग़ाज़ा रवाना 

फ्रीडम फ्लोटिला कोएलिशन (FFC) ने ऐलान किया कि, उनका नागरिक सहायता जहाज़ “हनज़ला” आधिकारिक रूप से इटली के शहर सिराकूसा से रवाना हो गया है और अब ग़ाज़ा की ओर बढ़ रहा है। यह जहाज़ ग़ाज़ा के लोगों के लिए खाद्य सामग्री और दवाइयाँ लेकर जा रहा है और फ़िलस्तीनी जनता पर इज़रायल द्वारा थोपे गए ग़ैर-कानूनी नाकेबंदी को चुनौती देने की एक साहसिक कोशिश है।

यह मिशन, एफएफसी की एक और नाव “मेडेलिन” पर इज़रायली हमले के कुछ ही हफ्तों बाद शुरू हुआ है। उस हमले में इज़रायली बलों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हिंसक कार्रवाई करते हुए जहाज़ को क़ब्जे में ले लिया था और उसमें सवार यूरोपीय संसद सदस्य, डॉक्टर, पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं समेत 12 निहत्थे नागरिकों को अगवा कर इज़रायल ले जाया गया, जहाँ उनसे जबरदस्ती पूछताछ की गई और बाद में उन्हें निर्वासित कर दिया गया। इनका “अपराध” सिर्फ इतना था कि वे घिरे हुए फ़िलस्तीनियों तक भोजन, दवा और एकजुटता पहुँचाने की कोशिश कर रहे थे।

यह जहाज़ एक प्रसिद्ध फ़िलस्तीनी कार्टून चरित्र “हनज़ला” के नाम पर है — एक नंगे पांव का शरणार्थी बच्चा जो अन्याय को स्वीकार करने से इनकार करता है और कसम खाता है कि जब तक फ़िलस्तीन आज़ाद नहीं होता, वह पीछे नहीं हटेगा। यह जहाज़ उन ग़ाज़ा के बच्चों की आत्मा का प्रतीक है जो पूरी ज़िंदगी युद्ध, नाकाबंदी और हिंसा में गुज़ार रहे हैं।

FFC, जो कि 2010 में विभिन्न देशों के स्वयंसेवकों के समूह के रूप में बना था, ग़ाज़ा की नाकेबंदी को चुनौती देने के लिए लगातार सहायता जहाज़ भेज रहा है। उनके हालिया जहाज़ ‘हनज़ला’ पर डॉक्टर, वकील, कार्यकर्ता और पत्रकार शामिल हैं — ये सभी आम नागरिक हैं और किसी सरकार से संबंध नहीं रखते। फ्रीडम फ्लोटिला का कहना है कि वे ग़ाज़ा में हो रहे अत्याचारों के बारे में जागरूकता फैलाने और सहायता पहुँचाने की कोशिशें जारी रखेंगे।

ज्ञात हो कि घिरे हुए ग़ाज़ा पट्टी में पिछले 21 महीनों से इज़रायल द्वारा जारी फ़िलस्तीनियों के नरसंहार में अब तक लगभग 58 हज़ार से ज़्यादा फ़िलस्तीनी मारे जा चुके हैं, जिनमें अधिकतर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि असली मौतों की संख्या ग़ज़ा प्रशासन द्वारा बताई गई संख्या से कहीं अधिक, लगभग दो लाख तक हो सकती है। इस जनसंहार में इज़रायल ने ग़ाज़ा के अधिकतर इलाकों को मलबे में बदल दिया है और वहाँ की करीब 22 लाख आबादी को बेघर कर दिया है। इसके अलावा, ज़रूरी मानवीय सहायता की आपूर्ति को भी रोक दिया गया है, जिससे वहाँ मानवीय संकट और गहरा होता जा रहा है।

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