“ऑपरेशन वादा-ए-सादिक 4” की 66वीं लहर: पश्चिमी क़ुद्स, हाइफ़ा और अल-ज़फ़रा बेस पर सफल हमला

“ऑपरेशन वादा-ए-सादिक 4” की 66वीं लहर: पश्चिमी क़ुद्स, हाइफ़ा और अल-ज़फ़रा बेस पर सफल हमला

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के जनसंपर्क विभाग ने घोषणा की है कि “ऑपरेशन वादा-ए-सादिक 4” की 66वीं लहर हाल ही में हुए बमबारी के शहीदों को समर्पित करते हुए पश्चिमी क़ुद्स (यरुशलम), हाइफ़ा और क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सेना के अल-ज़फ़रा एयरबेस के खिलाफ पूरी सफलता के साथ अंजाम दी गई।

इस हमले में भारी-भरकम, अत्यंत सटीक (प्रिसिजन) और बहु-वारहेड (मल्टी-वारहेड) मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल किया गया, जिनमें क़द्र, खोर्रमशहर, खैबर-शिकन, मध्यम दूरी की क़याम और ज़ुल्फ़िकार मिसाइलें शामिल हैं। इसके अलावा, आत्मघाती ड्रोन (कामिकाज़े ड्रोन) भी प्रयोग में लाए गए।

बयान में चेतावनी दी गई: “हम तुम्हें नहीं छोड़ेंगे।”

यह हमला हाल के बमबारी में मारे गए लोगों के जवाब के रूप में किया गया। इस 66वीं लहर में खास तौर पर तीन प्रमुख लक्ष्यों को निशाना बनाया गया:

1- पश्चिमी क़ुद्स (यरुशलम का पश्चिमी हिस्सा), जो राजनीतिक और सैन्य रूप से संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।

2- हाइफ़ा, जहां बड़े औद्योगिक और ऊर्जा प्रतिष्ठान मौजूद हैं।

3- अल-ज़फ़रा एयरबेस, जो खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा है।

पूर्वी सऊदी अरब में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमला

दूसरी खबर के मुताबिक, सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से—जहां तेल उत्पादन और अमेरिकी हित काफी अधिक हैं—वहां ड्रोन के जरिए हमला किया गया।

सऊदी अरब का पूर्वी क्षेत्र (खासतौर पर खाड़ी के पास) रणनीतिक रूप से बेहद अहम है, क्योंकि:

यहां बड़े तेल भंडार और रिफाइनरी मौजूद हैं।

अमेरिकी सैन्य और लॉजिस्टिक सुविधाएं भी इसी इलाके में स्थित हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, ड्रोन “झुंड” (swarm) के रूप में भेजे गए, यानी एक साथ कई ड्रोन अलग-अलग दिशाओं से लक्ष्य की ओर बढ़े। इस तरह के हमलों का उद्देश्य आमतौर पर:

1- एयर डिफेंस सिस्टम को भ्रमित करना

2- एक साथ कई ठिकानों पर दबाव बनाना

3- आर्थिक और सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचाना होता है।

हालांकि, नुकसान की सटीक जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इस तरह के हमले यह दिखाते हैं कि क्षेत्रीय तनाव अब केवल एक जगह तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व में फैलता जा रहा है।

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