लेबनान में युद्धविराम हमारे लिए ईरान के युद्धविराम जितना ही महत्वपूर्ण है: क़ालिबाफ़
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर क़ालिबाफ़ ने लेबनान के मुद्दे पर बेहद सख्त और स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि लेबनान में युद्धविराम, ईरान के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना खुद उसके अपने देश में शांति स्थापित होना। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है और इज़रायल लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहा है।
क़ालिबाफ़ ने लेबनान की संसद के अध्यक्ष नबीह बेरी से टेलीफोन पर बातचीत में कहा कि ईरान कभी भी अपने लेबनानी भाइयों को अकेला नहीं छोड़ेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ईरान, लेबनान को सिर्फ एक सहयोगी नहीं बल्कि अपने ही परिवार का हिस्सा मानता है। उन्होंने यह भी बताया कि तेहरान लगातार लेबनान की स्थिति पर नज़र रखे हुए है और हर स्तर पर युद्धविराम सुनिश्चित करने के प्रयास कर रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि इस्लामाबाद में हुई वार्ताओं और अन्य कूटनीतिक प्रयासों के जरिए ईरान दुश्मनों को मजबूर करने की कोशिश कर रहा है कि वे सभी मोर्चों पर स्थायी युद्धविराम को स्वीकार करें। क़ालिबाफ़ के अनुसार, क्षेत्र में शांति केवल तभी संभव है जब इज़रायल अपनी आक्रामक नीतियों को रोके और अंतरराष्ट्रीय समझौतों का सम्मान करे।
दूसरी ओर, नबीह बेरी ने इज़रायल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह लेबनान में “वास्तविक अपराध” कर रहा है। उनके अनुसार, इज़रायली हमलों के कारण अब तक 12 लाख से अधिक लोग अपने घरों से बेघर हो चुके हैं, जो एक मानवीय संकट का रूप ले चुका है।उन्होंने साफ कहा कि लेबनानी जनता और हिज़्बुल्लाह के प्रतिरोधी लड़ाके अपने अधिकारों की रक्षा के लिए डटे हुए हैं और किसी भी तरह का समझौता, जो इज़रायल को फायदा पहुंचाए, स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम में इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि नेतन्याहू अपनी घरेलू राजनीतिक और भ्रष्टाचार से जुड़ी समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए क्षेत्र में तनाव को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसे में लगातार युद्ध की स्थिति बनाए रखना उनके राजनीतिक हितों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है, भले ही इससे क्षेत्र में व्यापक तबाही और मानवीय संकट क्यों न पैदा हो।
ईरान और हिज़्बुल्लाह का कहना है कि वे केवल आत्मरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि इज़रायल की नीतियां पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर रही हैं। इस बीच, लेबनान के लोगों का संकट गहराता जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है।


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