अमेरिका के प्रसिद्ध पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार टकर कार्लसन ने कहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जानते हैं कि ईरान के साथ समझौते में सबसे बड़ी बाधा अमेरिकी कांग्रेस नहीं, बल्कि इस्राईल है।
कार्लसन के अनुसार, इस्राईल पहले भी कई बार ऐसे समझौतों में रुकावट डाल चुका है और इस बार भी वह ईरान-अमेरिका समझौते को प्रभावित करने की कोशिश कर सकता है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच पहली तकनीकी और विशेषज्ञ स्तर की बैठक स्विट्जरलैंड में होने जा रही है। इस बैठक में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
कार्लसन ने हाल ही में हुए ईरान-अमेरिका समझौते की तुलना 1956 के स्वेज संकट से की। उनका कहना है कि इस समझौते से अमेरिका ने स्वीकार किया है कि ईरान क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली देश है।
उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया की सबसे शक्तिशाली और महंगी सेना होने के बावजूद अमेरिका अपनी इच्छा ईरान पर पूरी तरह नहीं थोप सका।
कार्लसन के मुताबिक, जैसे स्वेज संकट ने ब्रिटिश साम्राज्य की कमजोरी को उजागर किया था, वैसे ही यह समझौता अमेरिका की घटती वैश्विक शक्ति को दिखाता है।
टकर कार्लसन का मानना है कि ईरान-अमेरिका समझौते के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती इस्राईल है, और यह समझौता वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत हो सकता है

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