तमिलनाडु सरकार और डीएमके का वक़्फ़ बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान

तमिलनाडु सरकार और डीएमके का वक़्फ़ बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का ऐलान

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने लोकसभा में वक़्फ़ संशोधन विधेयक पारित होने की कड़ी निंदा की और इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई की घोषणा की। उन्होंने कहा कि डीएमके इसके ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। वक़्फ़ संशोधन विधेयक के विरोध में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और डीएमके विधायक गुरुवार को काले बिल्ले लगाकर तमिलनाडु विधानसभा पहुंचे।

उन्होंने कहा कि डीएमके इस वक़्फ़ संशोधन विधेयक पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने इसे संविधान और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर हमला क़रार देते हुए कहा कि. भाजपा ने संयुक्त विपक्ष के विरोध को नजरअंदाज करते हुए आधी रात को वक़्फ़ विधेयक पारित किया। तमिलनाडु सरकार और डीएमके दोनों इस बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।

एमके स्टालिन ने कहा कि यह बेहद निंदनीय है कि भारी विरोध के बावजूद बिल संसद में पारित हो गया। संसद के 232 सदस्यों ने इसके ख़िलाफ़ और 288 सदस्यों ने इसके पक्ष में वोट किया। उन्होंने कहा कि इस संशोधन का न सिर्फ विरोध किया जाना चाहिए बल्कि इसे पूरी तरह वापस लेना चाहिए। ये हमारा विचार है। इसीलिए हमने विधानसभा में एक प्रस्ताव पारित किया है।

स्टालिन ने कहा, “इसे ध्यान में रखते हुए आज हम विधानसभा सत्र में काले बिल्ले पहनकर आए।” डीएमके की ओर से हम इस वक़्फ़ संशोधन विधेयक पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।

गौरतलब है कि कल एमके स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर प्रस्तावित वक़्फ़ बिल 2024 को पूरी तरह से वापस लेने का आग्रह किया था। इससे पहले भी उन्होंने विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर इस बिल को वापस लेने की मांग की थी।

तमिलनाडु विधानसभा में वक़्फ़ संशोधन विधेयक के खिलाफ पारित प्रस्ताव में कहा गया कि भारत के लोग धार्मिक सद्भाव के साथ रह रहे हैं। संविधान ने सभी लोगों को अपने धर्म का पालन करने का अधिकार दिया है। चुनी हुई सरकारों को इसकी रक्षा करनी चाहिए।

तमिलनाडु विधानसभा ने सर्वसम्मति से इस बात पर जोर दिया कि केंद्र सरकार वक़्फ़ संशोधन विधेयक, 2024को वापस ले और अल्पसंख्यक मुसलमानों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के लिए वक़्फ़ अधिनियम, 2013 में संशोधन नहीं किया जाना चाहिए।

स्टालिन ने कहा था कि इस बिल से वक़्फ़ बोर्ड की शक्तियां प्रभावित होंगी। उन्होंने गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि इससे मुसलमानों की भावनाओं पर असर पड़ रहा है, लेकिन मोदी सरकार को इसकी कोई परवाह नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जब मुसलमान किसी संशोधन की मांग नहीं कर रहे हैं तो यह संशोधन क्यों लाया जा रहा है।

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