इज़रायल का प्लान-B: मैदान में हार की भरपाई के लिए अफ़वाहों का सहारा
अमेरिका और ज़ायोनिस्ट शासन के गठबंधन को अपने तय सैन्य लक्ष्यों को हासिल करने में नाकामी और इस्लामी गणराज्य ईरान की ओर से भारी व अप्रत्याशित जवाबी चोटें मिलने के बाद, ऐसा प्रतीत होता है कि विरोधी मोर्चा अब टकराव के एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। मैदानी और विश्लेषणात्मक संकेत बताते हैं कि ईरान के दुश्मनों ने रणनीति बदलते हुए अपना “प्लान-B” सक्रिय कर दिया है, जिसका उद्देश्य आंतरिक अव्यवस्था फैलाना और असुरक्षा पैदा करना है।
इस मनोवैज्ञानिक युद्ध के ताज़ा उदाहरण में, ज़ायोनिस्ट शासन के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने ईरान के शीर्ष अधिकारियों को निशाना बनाए जाने का एक निराधार दावा करते हुए ईरानी जनता से सड़कों पर उतरने की अपील की। इसी के साथ, इज़राइली नेटवर्कों, जिनमें “इंटरनेशनल नेटवर्क” भी शामिल है, ने सर्वोच्च नेता की शहादत की अफ़वाह को बार-बार और व्यापक रूप से फैलाकर इस असफल परिदृश्य को मीडिया और मानसिक माहौल का सहारा देने की कोशिश की।
विश्लेषकों का मानना है कि इस परिदृश्य का उद्देश्य ज़ायोनिस्ट शासन के गिने-चुने आंतरिक समर्थकों को “कृत्रिम साँस” देना और सड़क पर अशांति के लिए ज़मीन तैयार करना है। यह रणनीति ऐसे समय लागू की जा रही है जब हाल के महीनों में हुई नाकाम तख़्तापलट की कोशिशों में भी वही उपद्रवी तत्व अमेरिका के लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहे थे।
मैदानी प्रतिक्रिया: जनता की असहभागिता और गिने-चुने मामलों की रिपोर्ट
देशभर से मिली रिपोर्टें बताती हैं कि ईरान की जनता ने पूरी सूझ-बूझ के साथ न केवल इन बेबस अपीलों पर कोई ध्यान नहीं दिया, बल्कि स्वयं एक सक्रिय नियंत्रक तत्व के रूप में सामने आई है। विश्वसनीय समाचार स्रोतों के अनुसार, नागरिकों ने बार-बार संबंधित संस्थाओं से संपर्क कर कुछ इलाकों में हर्षोल्लास या सड़क पर गतिविधियों के बेहद सीमित और गिने-चुने मामलों की सूचना दी है।
मैदानी रिपोर्टों के मुताबिक, इन लोगों की संख्या इतनी कम और बिखरी हुई है कि किसी भी तरह की चिंता की कोई गुंजाइश नहीं है। यह सीमित समूह, जो अधिकतर प्रतिक्रांतिकारी तत्वों और राजशाही समर्थकों के हमदर्दों से बना है, मीडिया माहौल का दुरुपयोग कर दुश्मन की परियोजना के लिए नकली प्रतिक्रिया पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
दुश्मन के सॉफ्ट वॉर की पहेली को पूरा करना
ऐसा लगता है कि इस परिदृश्य के योजनाकारों ने पहले से चरणबद्ध नक़्शा तैयार कर रखा था: सैन्य हमले के बाद पहले देश के शीर्ष नेताओं के बारे में मनोवैज्ञानिक अभियान और अफ़वाहें फैलाना, फिर एक अल्पसंख्यक को सड़कों पर लाना और उसके बाद अलगाववादी गुटों को सक्रिय कर देश की सुरक्षा को निशाना बनाना। लेकिन जनता की निर्णायक असहभागिता ने इस खतरनाक योजना को आगे बढ़ने से रोक दिया।
राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि इस तरह की खबरें गढ़ने और मीडिया माहौल बनाने का उद्देश्य जानकारी इकट्ठा करना, डेटा का आपसी मिलान करना, “फ़ीडबैक” लेना और आभासी व वास्तविक दोनों ही क्षेत्रों में अपनी क्षमता का आकलन करना है। ज़ोर दिया जाता है कि ज़ायोनिस्ट शासन और अमेरिका द्वारा रचे गए इस खेल में नहीं फँसना चाहिए; जनता और अधिकारियों की सतर्कता ही इन साज़िशों के सामने सबसे मज़बूत दीवार है।
भले ही टकराव का सैन्य चरण ईरान के लिए सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा हो, लेकिन यह साफ़ है कि दुश्मन का मीडिया और मनोवैज्ञानिक युद्ध और भी ज़्यादा तीव्र होता जा रहा है। जनता की सतर्कता, संदिग्ध मामलों की सुरक्षा संस्थाओं को सूचना देना और अफ़वाहों पर ध्यान न देना—यही ईरान इस्लामी गणराज्य के दुश्मनों के “प्लान-B” को नाकाम करने के सबसे अहम उपाय हैं।


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