लंदन: नस्ली भेदभाव का शिकार भारतीय कर्मचारी को केएफसी देगा 81 लाख रुपये का मुआवज़ा
दक्षिण-पूर्वी लंदन में केएफसी के एक भारतीय कर्मचारी ने अपने पूर्व प्रबंधक के विरुद्ध नस्ली भेदभाव और गलत तरीके से नौकरी से निकाले जाने का मुकदमा जीत लिया है। इस संबंध में ब्रिटेन की रोजगार न्यायालय ने केएफसी को आदेश दिया है कि वह उसे 67 हज़ार यूरो, यानी लगभग 81 लाख रुपये का मुआवज़ा दे। तमिलनाडु से संबंध रखने वाले माधेश रविचंद्रन ने न्यायालय में बताया कि पश्चिमी विकहम स्थित केएफसी की एक शाखा में काम करने के दौरान उन्हें नस्ली भेदभाव और अनुचित व्यवहार का सामना करना पड़ा।
शिकायतकर्ता को “ग़ुलाम” कहा जाता था
रविचंद्रन ने जनवरी 2023 में केएफसी आउटलेट में काम शुरू किया था। न्यायालय के निष्कर्षों के अनुसार, नौकरी के दो महीने बाद उनकी छुट्टी की मांग ठुकरा दी गई। इसी दौरान उन्होंने अपने श्रीलंकाई मूल के प्रबंधक को उनके बारे में अपमानजनक टिप्पणियां करते हुए सुना, जिसमें उन्हें “ग़ुलाम” कहा गया और यह कहा गया कि “भारतीय ग़ुलाम होते हैं।” पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि ये टिप्पणियां और कार्यवाही रविचंद्रन के साथ किए गए नस्ली भेदभाव को दर्शाती हैं।
अतिरिक्त काम करने के लिए मजबूर किया गया
न्यायालय ने यह भी सुना कि रविचंद्रन को उनके अनुबंध से अधिक समय तक काम करने के लिए मजबूर किया गया। उनका आरोप था कि यह सब भेदभावपूर्ण उद्देश्य से किया गया। न्यायाधीश पॉल एबॉट का मानना है कि प्रबंधक के व्यवहार ने रविचंद्रन की गरिमा को ठेस पहुंचाई और नस्ली भेदभाव तथा शोषण को बढ़ावा दिया। समय के साथ प्रबंधक और कर्मचारी के संबंध बिगड़ते चले गए और रविचंद्रन को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
न्यायालय ने यह भी पाया कि उन्हें बिना किसी कानूनी नोटिस के नौकरी से निकाल दिया गया, जबकि वे इसके हकदार थे। नियोक्ता ने बिना कारण बताए और बिना पूर्व सूचना के उन्हें हटा दिया। इसलिए रविचंद्रन को 62,690 यूरो का भुगतान करने का आदेश दिया गया। इसके अतिरिक्त, छुट्टियों के भुगतान और अन्य कर्मचारी लाभों को मिलाकर कुल लगभग 67 हज़ार यूरो का मुआवज़ा देने का आदेश दिया गया है।
मुआवज़े के साथ-साथ न्यायालय ने केएफसी आउटलेट का संचालन करने वाली कंपनी नेक्सस फूड्स लिमिटेड के मालिक को निर्देश दिया है कि वे सभी कर्मचारियों के लिए नस्ली भेदभाव विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें। इसमें विशेष रूप से प्रबंधकों को यह सिखाया जाए कि कर्मचारियों के साथ कैसा व्यवहार किया जाना चाहिए।
यह मामला ब्रिटेन में कर्मचारियों के अधिकारों और नस्ली भेदभाव से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करता है तथा यह दर्शाता है कि नस्ली आधार पर दुर्व्यवहार का सामना करने वाले कर्मचारियों के लिए कानूनी संरक्षण उपलब्ध है।


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