मौजूदा क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत इस्राईल ने की है: एर्दोगान

मौजूदा क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत इस्राईल ने की है: एर्दोगान

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान ने अल-जज़ीरा को दिए एक साक्षात्कार में क्षेत्र में जारी युद्ध, ईरान, लेबनान, ग़ाज़ा और क्षेत्र के अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर बात की और इन मुद्दों पर अंकारा का रुख स्पष्ट किया।

फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के अंतरराष्ट्रीय समूह के अनुसार, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान ने अल-जज़ीरा के साथ साक्षात्कार में तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए ‘मक्का रक्षा समझौते’ का ज़िक्र करते हुए कहा कि, यह समझौता केवल इन तीन देशों तक सीमित नहीं है। यदि मिस्र और अन्य देश चाहें तो वे भी इसमें शामिल हो सकते हैं।

एर्दोगान ने मौजूदा क्षेत्रीय युद्ध की शुरुआत के लिए इस्राईल को मुख्य रूप से ज़िम्मेदार बताया और सीरिया के लिए तुर्की के समर्थन को जारी रखने पर ज़ोर दिया।

ईरान के साथ युद्ध के बारे में तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा कि, अंकारा क्षेत्र में किसी भी प्रकार के युद्ध का पूरी तरह विरोध करता है और शांति का समर्थन करता है। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि, इस्राईल इस युद्ध का मुख्य कारण और प्रमुख पक्ष रहा है तथा तेल अवीव ने हमेशा युद्ध के विकल्प को बढ़ावा दिया है। एर्दोगान के अनुसार, इस नीति ने क्षेत्र के देशों पर भारी कीमत और गंभीर नुक़सान डाला है।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि, हमारी आशा है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से आवाजाही पूरी तरह स्वतंत्र हो और इसके लिए किसी प्रकार का शुल्क न लिया जाए। यह अधिक सही और उचित क़दम होगा। स्वतंत्र आवागमन से समुद्री परिवहन और वैश्विक व्यापार पर बहुत सकारात्मक और लाभकारी प्रभाव पड़ेगा।

इस्राईल के साथ युद्ध के सवाल पर एर्दोगान का जवाब

इस्राईल के साथ युद्ध की संभावना के बारे में पूछे जाने पर एर्दोगान ने कहा, “हम युद्ध की बात नहीं कर रहे हैं, हम शांति की बात कर रहे हैं। लेकिन अगर कोई तुर्की पर हमला करना चाहता है और शांति के बजाय युद्ध का रास्ता चुनता है, तो तुर्की युद्ध करने में न तो संकोच करेगा और न ही उससे पीछे हटेगा।”

यूरोपीय संघ अब तुर्की की प्राथमिकता नहीं

एर्दोगान ने यूरोपीय संघ के बारे में कहा कि पिछले 53 वर्षों से यूरोप ने तुर्की को स्वीकार नहीं किया है और ऐसा भी नहीं लगता कि निकट भविष्य में तुर्की की यूरोपीय संघ की सदस्यता संभव होगी। यूरोपीय संघ अब तुर्की की प्राथमिकता नहीं है और यदि यही स्थिति जारी रहती है तो अंततः यूरोप को ही इसका नुक़सान उठाना पड़ेगा।

कुर्दों के मुद्दे पर तुर्की का रुख

तुर्की के राष्ट्रपति ने कुर्दों के मुद्दे पर कहा कि अंकारा तुर्की के भीतर और क्षेत्र के अन्य देशों में रहने वाले कुर्द नागरिकों के साथ अपने संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि सीरिया के कुर्दों को उनके अधिकार प्राप्त होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि, तुर्की इराक़, ईरान और सीरिया में कुर्दों के साथ एकता और सहयोग बनाए रखना चाहता है।

सीरिया को  सहयोग और समर्थन जारी रहेगा 

सीरिया के बारे में एर्दोगान ने कहा कि, तुर्की विभिन्न माध्यमों और तंत्रों के जरिए दमिश्क़ के साथ अच्छे संबंध और संपर्क बनाए हुए है तथा वह सीरिया के साथ सहयोग और समर्थन जारी रखेगा।

उन्होंने सीरिया को “भाईचारे वाला देश” बताते हुए कहा कि तुर्की उसे अकेला नहीं छोड़ेगा। उन्होंने कहा कि, इस दौर में सीरिया की जनता देखेगी कि भाईचारे वाले देश उनके समर्थन के लिए कितने प्रतिबद्ध हैं।

ग़ाज़ा को अकेला नहीं छोड़ेंगे

ग़ाज़ा के घटनाक्रम के बारे में तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा, “हम ग़ाज़ा को अकेला नहीं छोड़ सकते। ग़ाज़ा के प्रति हमारी जो भी ज़िम्मेदारी थी, हमने उसे अब तक निभाया है और आगे भी निभाते रहेंगे।”

उन्होंने कहा कि, हमास अपनी ओर से जितनी ईमानदार एकजुटता दिखा सकता है, वह दिखा रहा है, लेकिन इस्राईल की ओर से ऐसा सकारात्मक रवैया दिखाई नहीं देता। उन्होंने आरोप लगाया कि इस्राईल अब भी आक्रामक रवैया अपनाते हुए लेबनान और ग़ाज़ा पर अपने हमले जारी रखे हुए है।

एर्दोगान ने कहा, “मैं देख रहा हूं कि ट्रंप इन घटनाक्रमों से परेशान हैं। हम इस संबंध में विभिन्न चेतावनियां दे रहे हैं और आगे भी देते रहेंगे।”

लेबनान को इस्राईली हमलों से बचाना होगा

लेबनान के हालात पर एर्दोगान ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में इस्राईल स्पष्ट रूप से हमलावर पक्ष है। उन्होंने कहा कि लेबनान लगातार इस्राईली हमलों का निशाना बन रहा है और हमें जितनी जल्दी हो सके लेबनान को इन हमलों से बचाना होगा।

उन्होंने कहा कि तुर्की ने इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ बातचीत की है और आगे भी उसके साथ विचार-विमर्श जारी रखेगा। उन्होंने बताया कि ट्रंप की तुर्की यात्रा के दौरान भी इन मुद्दों पर उनके साथ बातचीत हुई थी और आने वाले समय में भी तुर्की अमेरिकी पक्ष के साथ अपनी बातचीत जारी रखेगा।

सीरिया में तुर्की की सैन्य मौजूदगी

सीरिया में तुर्की के सैन्य ठिकानों और तुर्की की सैन्य मौजूदगी के बारे में पूछे जाने पर एर्दोगान ने कहा कि क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए तुर्की की जो भी ज़िम्मेदारी होगी, उसे पूरा करने में वह कोई कसर नहीं छोड़ेगा और इस दिशा में अपने प्रयास जारी रखेगा।

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