युद्ध-विराम में लेबनान भी शामिल होना चाहिए: फ्रांस
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित दो सप्ताह का युद्ध-विराम केवल इन दो देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसमें लेबनान को भी शामिल किया जाना चाहिए। मैक्रों ने स्पष्ट किया कि यदि इज़रायल द्वारा लेबनान में जारी सैन्य हमले नहीं रुकते, तो क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना मुश्किल होगा। उनके अनुसार, व्यापक और समावेशी युद्ध-विराम ही तनाव कम करने का एकमात्र प्रभावी रास्ता है।
आज लेबनान में इज़रायल के वहशियाना हमलों में 87 शहीद और 700 से अधिक घायल
इसी बीच, लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी है कि, इज़रायल द्वारा देश के अलग-अलग इलाकों पर किए गए ताज़ा हमलों में अब तक 87 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 700 से अधिक नागरिक घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, घायलों में बड़ी संख्या महिलाओं और बच्चों की है, जिससे मानवीय संकट और गंभीर हो गया है।
राहत और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, लेकिन लगातार हमलों के कारण स्थिति बेहद कठिन बनी हुई है। अस्पतालों पर दबाव बढ़ता जा रहा है और दवाइयों व चिकित्सा संसाधनों की कमी भी सामने आ रही है।
इस्लामाबाद वार्ता में भागीदारी के लिए ईरान की शर्त: लेबनान में भी युद्ध-विराम होना चाहिए
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तान में प्रस्तावित वार्ता में शामिल होने के लिए एक स्पष्ट शर्त रखी है। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ईरान ने क्षेत्रीय मध्यस्थों को सूचित किया है कि वह तभी बातचीत में हिस्सा लेगा, जब लेबनान में पूर्ण युद्ध-विराम लागू किया जाएगा। यह रुख दर्शाता है कि, तेहरान क्षेत्रीय संघर्षों को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ मानता है और किसी एक मोर्चे पर शांति को दूसरे से अलग नहीं देखता।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान ने अप्रत्यक्ष रूप से चेतावनी दी है कि, यदि उसकी शर्तों को नजरअंदाज किया गया, तो वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सकता है। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए ईरान का यह संकेत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का कारण बन सकता है।
कुल मिलाकर, इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि मध्य पूर्व में तनाव केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई मोर्चों पर फैल चुका है। ऐसे में कूटनीतिक प्रयासों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी पक्ष कितनी व्यापक और संतुलित शांति पहल पर सहमत होते हैं।


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