कुवैत की धरती से अमेरिका की सैन्य गतिविधियों को लेकर ईरान ने आपत्ति जताई

कुवैत की धरती से अमेरिका की सैन्य गतिविधियों को लेकर ईरान ने आपत्ति जताई

ईरान ने कुवैत की धरती का इस्तेमाल किसी बाहरी देश की आक्रामक सैन्य गतिविधियों के लिए किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कुवैत सरकार से कहा है कि वह दूसरों पर आरोप लगाने के बजाय इस बात पर ध्यान दे कि उसकी भूमि का इस्तेमाल किसी अन्य देश की सैन्य कार्रवाइयों के लिए न किया जाए।

ईरानी प्रवक्ता ने विशेष रूप से अमेरिका की सैन्य गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुवैती क्षेत्र का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किसी भी आक्रामक कार्रवाई के लिए नहीं होना चाहिए। तेहरान का कहना है कि किसी पड़ोसी देश की भूमि, हवाई क्षेत्र या सैन्य सुविधाओं का इस्तेमाल यदि किसी बाहरी शक्ति द्वारा दूसरे क्षेत्रीय देश के खिलाफ सैन्य अभियान के लिए किया जाता है, तो इसका असर केवल दो देशों के संबंधों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता प्रभावित होती है।

ईरान ने इस संदर्भ में कुवैत से अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। तेहरान का कहना है कि, पड़ोसी देशों के बीच अच्छे संबंध बनाए रखना तभी संभव है, जब उनकी धरती का इस्तेमाल एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए न किया जाए।

ईरान का संदेश: पश्चिम एशिया की सुरक्षा क्षेत्रीय देशों के हाथों में हो

ईरानी विदेश मंत्रालय के इन बयानों का व्यापक संदेश यह है कि पश्चिम एशिया के देशों को अपनी सुरक्षा के लिए बाहरी शक्तियों पर अत्यधिक निर्भर रहने के बजाय एक ऐसी क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था विकसित करनी चाहिए, जिसमें फैसले स्वयं क्षेत्रीय देश लें।

तेहरान लंबे समय से यह रुख व्यक्त करता रहा है कि पश्चिम एशिया की सुरक्षा किसी बाहरी शक्ति के सैन्य हस्तक्षेप से नहीं, बल्कि क्षेत्रीय देशों के बीच संवाद, सहयोग, आपसी सम्मान और सामूहिक सुरक्षा से सुनिश्चित की जा सकती है। ईरान के अनुसार, अमेरिका जैसी बाहरी शक्तियों की सैन्य उपस्थिति क्षेत्रीय तनाव को कम करने के बजाय कई बार उसे और बढ़ा देती है।

ईरान का यह भी कहना है कि वह अपने पड़ोसी देशों के साथ टकराव के बजाय संबंधों और सहयोग को प्राथमिकता देता है। तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब सहित क्षेत्र के विभिन्न देशों के साथ संबंधों का उल्लेख करते हुए तेहरान ने संकेत दिया है कि इन देशों के बीच मौजूद ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक संबंध किसी भी अस्थायी राजनीतिक मतभेद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।

ईरान के दृष्टिकोण में क्षेत्र की दीर्घकालिक और टिकाऊ सुरक्षा का रास्ता बाहरी सैन्य शक्तियों पर निर्भरता से नहीं, बल्कि क्षेत्रीय देशों के आपसी सहयोग, स्वतंत्र निर्णय, राष्ट्रीय संप्रभुता और एक-दूसरे के हितों के सम्मान से होकर गुजरता है।

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