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ईरान के सहयोगी दलों पर हमला, मध्यपूर्व में अमेरिका की नीतियां बदलेंगे बाइडन

ईरान के सहयोगी दलों पर हमला, मध्यपूर्व में अमेरिका की नीतियां बदलेंगे बाइडन

आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इराक के सशस्त्र दलों पर अमेरिका के हमलों ने कई सवालों को जन्म दे दिया है।

ईरान के सहयोगी समझे जाने वाले प्रतिरोधी दलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति के सीधे आदेश के बाद हुए हमले को लेकर अटकलों औलवर विश्लेषणों का दौर जारी है।

क्या ईरान के सहयोगी दलों पर अमेरिका के हवाई हमलों से मध्यपूर्व में बाइडन का खेल एवं नीति बदल जाएगी? बाइडन के सत्ता में आने के बाद से अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में अमेरिकी ठिकानों पर प्रतिरोधी दलों के हमले इस बात का प्रतीक हैं कि अमेरिका क्षेत्रीय दलों को रोकने के लिए बहुत गंभीर नहीं है। हालांकि बाइडन के आदेश के बाद सोमवार सुबह ईरान के सहयोगी समझे जाने वाले इन दलों के ठिकानों पर अमेरिका ने बमबारी की है।

जेरूसलम पोस्ट के अनुसार अमेरिका की तरफ से इस तरह की कार्यवाही मात्र एक संकेत है। जैसे वाशिंगटन कहने की कोशिश कर रहा हो कि अगर हम चाहे तो इन ठिकानों को निशाना बना सकते हैं।

हालांकि अमेरिका ने ऐसा कुछ किया भी है। उसने इन दलों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की है लेकिन सच्चाई यही है कि ऐसी कार्यवाही बहुत अधिक महत्व नहीं रखती। याद रहे कि आज सुबह अमेरिकी राष्ट्रपति के सीधे आदेश के बाद अमेरिकी सेना ने इराक सीरिया बॉर्डर पर स्थित इराक के सशस्त्र बल हश्दुश शअबी के तीन ठिकानों पर बमबारी की थी जिसमें इस बल के 4 जवान मारे गए हैं।

इराकी दलों ने अमेरिका की इस कार्यवाही की निंदा की है वहीं कई संगठनों ने भी अमेरिका को बदले की कार्रवाई के लिए तैयार रहने की धमकी दी है।

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