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पूर्व बांग्लादेशी सांसद समेत 6 लोगों को मृत्युदंड

पूर्व बांग्लादेशी सांसद समेत 6 लोगों को मृत्युदंड

बांग्लादेश में अवामी लीग के नेता और पूर्व सांसद मोहम्मद सैफुल इस्लाम सहित 6 लोगों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है, जबकि 7 लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश की एक अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के समर्थक और पूर्व सांसद मोहम्मद सैफुल इस्लाम तथा कई पुलिस अधिकारियों को वर्ष 2024 के विद्रोह के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड दिया।

इन अपराधों में प्रदर्शनकारियों की हत्या करना और उनके शवों को जलाना भी शामिल है। अदालत ने 7 लोगों को आजीवन कारावास और 2 लोगों को 7 वर्ष की कैद की सजा सुनाई, जबकि एक आरोपी को बरी कर दिया गया, जो बाद में सरकारी गवाह बन गया था। अदालत ने एक पूर्व सांसद की पूरी संपत्ति जब्त कर उसे जरूरतमंद लोगों में वितरित करने का भी आदेश दिया।

मामले के विवरण के अनुसार, 5 अगस्त 2024 को अशुलिया इलाके में 6 प्रदर्शनकारियों को गोली मारकर हत्या कर दी गई और उनके शव जला दिए गए। एक पीड़ित व्यक्ति उस समय भी जीवित था जब उसे आग लगा दी गई। यह घटना उसी दिन हुई जब अवामी लीग की सरकार गिर गई और शेख हसीना भारत भाग गईं।

मृत्युदंड पाने वालों में पूर्व सांसद मोहम्मद सैफुल इस्लाम, पूर्व अशुलिया थाना प्रभारी ए.एफ.एम. सईद, पूर्व सब-इंस्पेक्टर अब्दुल मलिक, पूर्व सहायक सब-इंस्पेक्टर बिश्वजीत साहा, पूर्व कांस्टेबल मोकुल चौधरी और अवामी लीग की युवा शाखा के नेता रोनी भुइयां शामिल हैं। 7 अन्य आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। ये सभी पुलिस अधिकारी हैं। मामले में शामिल 16 आरोपियों में से 8 इस समय हिरासत में हैं।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष नवंबर में इसी अदालत ने शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराध के एक अन्य मामले में मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, वर्ष 2024 के विद्रोह के दौरान लगभग 1,400 लोगों की मौत हुई और हजारों लोग घायल हुए। इनमें से अधिकांश मौतें पुलिस की गोलीबारी और अवामी लीग के कार्यकर्ताओं की कार्रवाइयों के कारण हुईं।

यह भी उल्लेखनीय है कि इस मामले की सुनवाई 7 अगस्त 2024 को शुरू हुई थी।

21 अगस्त को सभी 16 आरोपियों पर आरोप तय किए गए और अंतिम बहस सुनने के बाद 20 जनवरी को अदालत ने फैसला सुनाया। इस दौरान 63 गवाहों में से 24 अभियोजन पक्ष के गवाह और एक बचाव पक्ष के गवाह ने अपनी गवाही दर्ज कराई।

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