चार साल बाद नजरबंदी से मुक्त हुए हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज

चार साल बाद नजरबंदी से मुक्त हुए हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज

चार साल के लंबे अंतराल के बाद हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और कश्मीर के प्रमुख पुजारी मीरवाइज उमर फारूक को नजरबंदी से मुक्त कर दिया गया। मीरवाइज को श्रीनगर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में सामूहिक शुक्रवार की नमाज में शामिल होने की अनुमति दी गई थी।

जब मीरवाइज मस्जिद तक पहुंचे तो यह लोगों के साथ-साथ खुद मीरवाइज के लिए भी काफी भावुक क्षण था। मस्जिद में लोगों के सामने खड़े होकर वह फूट-फूटकर रोने लगे। रिहाई के बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में जुमे की नमाज पढ़ी।

ऑल पार्टी हुर्रियत कॉन्फ्रेन्स के चेयरमैन मीरवाइज मौलवी उमर फारूक चार सालों की नजरबंदी के बाद आज शुक्रवार 22 सितंबर 2023 को मुक्त हुए हैं। उन पर आतंकी हमले का अदेंशा देखते हुए नजरबंद किया गया था। उमर फारूक विश्व के 10 प्रभावशाली मुस्लिम नेताओं की सूची में शामिल हैं। उन्हें कभी भी सियासत में आना पसंद नहीं था लेकिन पिता की हत्या के बाद उन्हें सियासत में आना पड़ा।

पाकिस्तान को कश्मीरियों का हमदर्द मानने वाले मीरवाइज मौलवी उमर फारूक हमेशा कहते रहे कि पाकिस्तान सिर्फ राजनैतिक, कूटनीतिक समर्थन करता है। हुर्रियत के विभिन्न घटकों में बढ़ते मतभेद के बीच वर्ष 1997 में उन्होंने हुर्रियत के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया और कट्टरपंथी सैयद अली शाह गिलानी ने हुर्रियत की कमान संभाली। गिलानी का दो वर्ष पूर्व निधन हो गया है।

वह कश्मीर बनेगा पाकिस्तान का नारा देते थे। वर्ष 2002 में विस चुनावों में हुर्रियत के विभिन्न दलों पर अपने छद्म उम्मीदवार मैदान में उतारने और दिल्ली के साथ पर्दे के पीछे बातचीत के मुददे पर हुर्रियत कान्फ्रेंस गिलानी गुट और मीरवाइज गुट मे बंट गई।

मीरवाइज उमर फारूक को 04 अगस्त 2019 को नजरबंद किया गया था। जब भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 और 35ए को रद्द कर दिया था, इसके अलावा राज्य को विभाजित कर दिया गया था और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदल दिया गया था। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को उन्हें रिहा करने का फैसला लिया।

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