हम न तो हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोल सकते हैं और न ही ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमता को नष्ट कर सकते हैं:: पूर्व इज़रायली पीएम
इज़रायल के पूर्व प्रधानमंत्री Ehud Barak ने चैनल 13 के स्टूडियो में नेतन्याहू प्रशासन पर सनसनीख़ेज़ बयान देते हुए कहा, “हमसे इतनी झूठी बातें मत कहिए; न तो हम Strait of Hormuz (हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य) को खोल सकते हैं और न ही ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमता को नष्ट कर सकते हैं! हर युद्ध में ऐसे लक्ष्य तय करने चाहिए जो हासिल किए जा सकें, और उन्हें लागू करने के लिए जरूरी साधन और समय होना चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि अंत में हम क्या राजनीतिक परिणाम चाहते हैं,लेकिन इनमें से कोई भी चीज मौजूद नहीं है।
क्या यह तर्कसंगत और व्यावहारिक है कि हम कहें कि, यह युद्ध तब तक ख़त्म नहीं होगा जब तक ईरान से 60 प्रतिशत समृद्ध 450 किलो यूरेनियम बाहर नहीं निकाल लिया जाता? चाहे वह बलपूर्वक हो या कूटनीति के जरिए?
देखिए, मैं हर दिन प्रार्थना करता हूं कि, मैं ग़लत साबित हो जाऊं, लेकिन यह संभव नहीं लगता।
मेरे विचार से इन 450 किलो यूरेनियम को बाहर निकालने का कोई वास्तविक सैन्य रास्ता नहीं है।
यहां तक कि जब बेंजामिन नेतन्याहू ने घोषणा की थी कि, ईरान का परमाणु ख़तरा पीढ़ियों के लिए ख़त्म हो गया है, तो मैंने अगले ही दिन चैनल 13 और अन्य जगहों पर कहा था कि यह सही नहीं है और यहसच्चाई नहीं है।
इज़रायल ईरान के कार्यक्रम को कुछ हफ्तों से ज्यादा पीछे नहीं धकेल सकता, और अमेरिकी भी ऐसा नहीं कर सकते — मैंने तो यहां तक कहा था कि, शायद कुछ महीनों तक।
इसलिए मैं कहता हूं कि दुर्भाग्य से मुझे कोई व्यावहारिक रास्ता नजर नहीं आता। वास्तव में किसी को नहीं पता कि ये सामग्री कहां है??
ईरानियों ने एक ऐसी रणनीति अपनाई है जो लंबे समय से जानी जाती थी, लेकिन इसका व्यवस्थित मूल्यांकन नहीं किया गया।
क्या Strait of Hormuz (हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य) को खोला जा सकता है?
अमेरिका ने पिछले 60 वर्षों में कोई भी युद्ध नहीं जीता — एक भी नहीं। इन सभी बातों पर विचार करना चाहिए।
मैं उम्मीद करता हूं कि मैं गलत हूं, लेकिन मुझे डर है कि हम एक थकाऊ (लंबे खिंचने वाले) युद्ध के चरण में प्रवेश कर चुके हैं। ढाई साल बाद भी हम वहीं खड़े हैं जहां शुरुआत में थे।
Hamas (हमास) अब भी मौजूद है, जबकि इज़रायली अधिकारियों ने छह बार जीत का ऐलान किया था।
Hezbollah (हिज़्बुल्लाह) अब भी कायम है, जबकि कहा गया था कि वह दशकों पीछे चला गया है।
और ईरान का परमाणु और मिसाइल ख़तरा भी अपनी जगह बना हुआ है, जबकि दावा किया गया था कि उसे खत्म कर दिया गया है।
तो समस्या क्या है?
समस्या यह है कि जब आंकड़े और जानकारी सच नहीं होते और उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता, तो हम वास्तविकता को समझ ही नहीं सकते।
यहां तक कि, जो लोग सिस्टम के अंदर रहे हैं, उन्हें भी नहीं पता कि वास्तव में क्या हो रहा है।
हमें सीधे और खुले तौर पर गुमराह किया जा रहा है।
ऐसा नहीं कि सब कुछ बताया जाए, लेकिन कम से कम इतना खुला झूठ तो न बोला जाए।”

