आज ट्रंप गिड़गिड़ाने पर मजबूर हो गए हैं: ईरानी चीफ़ जस्टिस
ईरान के न्यायपालिका प्रमुख ने हालिया घटनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस युद्ध ने अमेरिका के उस झूठे “सुपरपावर” वाले भ्रम को पूरी तरह तोड़ दिया है, जिसे वह दशकों से दुनिया पर थोपता आया था। अमेरिका हमेशा खुद को ऐसी ताकत के रूप में पेश करता रहा, जिसके सामने कोई देश खड़ा होने की हिम्मत नहीं कर सकता, लेकिन अब सच्चाई सबके सामने आ चुकी है।
उन्होंने कहा कि इस संघर्ष ने यह साबित कर दिया कि जब कोई राष्ट्र अपने सिद्धांतों और आत्मसम्मान के साथ खड़ा होता है, तो बड़ी से बड़ी ताकत भी कमजोर पड़ जाती है। आज वैश्विक स्तर पर इस्लाम और ईरान की ताकत और प्रभाव पहले से कहीं अधिक बढ़ा हुआ दिखाई दे रहा है।
उन्होंने अपने बयान में आगे कहा गया कि, जो पहले धमकियों और दबाव की राजनीति करता था, अब खुद दूसरे देशों के सामने मदद के लिए हाथ फैला रहा है। खासकर होर्मुज़ जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए वह सहयोगियों से गुहार लगा रहा है, लेकिन उसे अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा।
यह स्थिति इस बात का संकेत मानी जा रही है कि, अमेरिका की वैश्विक पकड़ कमजोर हो रही है और उसके पारंपरिक सहयोगी भी अब उसके हर फैसले के साथ खड़े होने को तैयार नहीं हैं। कई देश अब अपनी स्वतंत्र नीति अपनाने लगे हैं और अमेरिकी दबाव को नजरअंदाज कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम को अमेरिका की गिरती साख और बदलते वैश्विक संतुलन के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था धीरे-धीरे खत्म होती नजर आ रही है।

