सऊदी अरब : युवाओं को मिला मृत्यु दंड, 10 साल की क़ैद में बदला

दुबई: सऊदी अरब मानवाधिकार आयोग ने रायटर्स को दिए बयान में कहा है कि तीन युवा नाबालिग शिया युवकों को दिया गया मृत्युदंड कम कर के दस साल की कैद में बदल दिया गया है।

इन युवकों में सऊदी अरब के लोकप्रिय शिया धर्मगुरु एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता शैख़ बाक़िर अल निम्र के भतीजे अली अल-निम्र भी शमिल है।

याद रहे कि जनवरी 2016 में बाक़िर अल निम्र को आले सऊद शासन ने मौत की सजा दी थी जिसके बाद सऊदी अरब समेत दुनिया भर में सऊदी सरकार के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे और विशेष कर सऊदी अरब और ईरान में काफी विरोध प्रदर्शन हुए थे ।

अली अल- निम्र को जब फरवरी 2012 में देश के पूर्वी प्रांत में विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने के कारण गिरफ्तार किया गया, तब वे 17 वर्ष के थे। अली के अलावा मृत्यु दंड से बचने वालों में दाऊद अल-मरहून और अब्दुल्लाह अल-ज़हीर हैं जो अपनी गिरफ्तारी के समय क्रमशः 17 एवं 15 वर्ष के थे। प्रदर्शन के दौरान बंदी बनाये गए तीनों युवकों को अदालत ने मौत की सजा सुनायी थी।

सऊदी मानवाधिकार आयोग ने रायटर्स को बताया कि निम्र नौ साल से ज़्यादा का समय जेल में बिता चुके हैं, उनकी सजा को रविवार को बदला गया है जबकि उनके दोनों साथियों की सजा को नवम्बर 2020 में बदल दिया गया था। मानवाधिकार आयोग के अनुसार 2022 में इन तीनों को समय सीमा के अनुसार रिहा कर दिया जाएगा।

अली निम्र की सज़ा में बदलाव की खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए उनकी मां ने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा ” ईश्वर ने चाहा तो जल्दी रिहाई होगी”।

याद रहे कि सऊदी अरब में पिछले साल ही यह शाही फरमान जारी किया गया था कि वयस्कों को मृत्युदंड दिया जाएगा जबकि नाबालिगों को 10 साल तक हिरासत केंद्रों में काटने होंगे।

मृत्युदंड विरोधी चैरिटी रेप्रीव ने इस खबर से खुशी जाहिर करते हुए आगाह किया कि सऊदी शासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ये फरमान सभी किशोर अपराधियों पर लागू हो। रेप्रीव की डायरेक्टर माया फोआ ने कहा कि ये फरमान केवल हाई प्रोफाइल मामलों के लिए नहीं है बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए है कि सऊदी अरब में किसी भी नाबालिग को मृत्यदंड ना दिया जाए।

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