मनोज जरांगे की भूख हड़ताल की घोषणा के बाद” मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की
मराठा सामाजिक कार्यकर्ता मनोज जरांगे द्वारा 30 मई से भूख हड़ताल शुरू करने की घोषणा के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मराठा आरक्षण के लिए गठित उपसमिति के अध्यक्ष और मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश कर दी है। उल्लेखनीय है कि पिछले आंदोलन के दौरान मनोज जरांगे ने विखे पाटिल को भी निशाने पर लिया था।
मनोज जरांगे ने शनिवार को घोषणा की कि वह 30 मई से आमरण भूख हड़ताल शुरू करेंगे, जो उनकी मृत्यु तक जारी रहेगी। मीडिया में उनके इस ऐलान के सुर्खियों में आते ही मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “अगर मेरे इस्तीफे से मनोज जरांगे को संतोष मिलता है, तो मैं उपसमिति के अध्यक्ष पद से चिपके रहने के बजाय इस्तीफा देना पसंद करूंगा।”
उन्होंने सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा, “अब तक मराठा आरक्षण के संबंध में हमने जो भी फैसले किए हैं, उन पर किसी भी अदालत ने रोक नहीं लगाई है। हम उन मराठा आंदोलनकारियों के बच्चों को नौकरी देने की कोशिश कर रहे हैं, जिनकी आंदोलन के दौरान मृत्यु हो गई थी।”
विखे पाटिल ने बताया, “हम उन्हें एसटी कॉर्पोरेशन में नौकरी देने के लिए तैयार थे, लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया। अब हम उन्हें महावितरण और एमआईडीसी में नौकरी देने का प्रयास कर रहे हैं।”
राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि, “जीआर के अनुसार कुनबी प्रमाणपत्र बांटने का काम जारी है। अब स्थानीय विधायक की जिम्मेदारी है कि वह इस काम में तेजी लाए। सरकार ने इसमें कोई कमी नहीं छोड़ी है।”
उन्होंने यह भी कहा, “यह सही है कि सतारा गजट को अभी लागू नहीं किया गया है, लेकिन उस पर काम जारी है। मैं स्वयं मनोज जरांगे से मुलाकात कर उन्हें अब तक किए गए कार्यों की पूरी जानकारी दूंगा। यदि कोई गलतफहमी होगी तो उसे दूर करने की कोशिश की जाएगी।”
उन्होंने कहा कि सरकार ने जितने भी वादे किए थे, उनमें से हर एक को पूरा करने का प्रयास किया गया है।

