अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि अगर अगले कुछ हफ्तों में होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो दुनिया को गंभीर ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।
वॉशिंगटन में काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के एक कार्यक्रम में बोलते हुए बिरोल ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए तेल की लगातार उपलब्धता बेहद जरूरी है। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ जाएगी।
फातिह बिरोल ने बताया कि हाल के दिनों में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। हालांकि चीन के बड़े तेल भंडार, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के बढ़ते उपयोग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट के विस्तार और IEA द्वारा करीब 40 करोड़ बैरल तेल जारी किए जाने जैसे कदमों से स्थिति को कुछ हद तक संभाला गया है।
बिरोल ने कहा कि ईरान से जुड़े युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति में गंभीर बाधा आई है, जिसे इतिहास के सबसे बड़े संकटों में से एक माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल किए गए अस्थायी उपाय हमेशा कारगर साबित नहीं होंगे।
उन्होंने बताया कि अमेरिका ने कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाया है, लेकिन वह रोजाना करीब 1 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल उपलब्ध कराकर पूरी दुनिया की कमी को पूरा नहीं कर सकता।
फातिह बिरोल के अनुसार, इस संकट का सबसे ज्यादा असर एशिया के देशों पर पड़ रहा है क्योंकि उनकी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते पूरा होता है।
उन्होंने कहा कि जापान, दक्षिण कोरिया, भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों को इस संकट से अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
बिरोल ने चेतावनी दी कि ईंधन महंगा होने पर विकासशील देशों में कई लोग लकड़ी और पशुओं के गोबर जैसे पारंपरिक ईंधन का इस्तेमाल करने को मजबूर हो सकते हैं। इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं, खासकर महिलाओं और बच्चों पर इसका अधिक असर पड़ सकता है।

