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हुर्मुज बाईपास करने की रणनीति, सऊदी-यूएई बना रहे तेल-गैस के वैकल्पिक रास्ते

नई दिल्ली: हुर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी देशों ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की तैयारी तेज कर दी है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात समेत कई देश अब ऐसे वैकल्पिक रास्तों पर काम कर रहे हैं, जिससे तेल और गैस निर्यात के लिए उन्हें इस समुद्री मार्ग पर पूरी तरह निर्भर न रहना पड़े।

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के कारण हुर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही प्रभावित हुई है। इस रूट से गुजरने वाले कुछ तेल टैंकरों पर हमलों के बाद समुद्री यातायात में भारी कमी आई है। इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।

हुर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। संघर्ष शुरू होने से पहले दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और गैस व्यापार का संचालन इसी रास्ते से होता था। इस मार्ग से रोजाना लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल वैश्विक बाजार तक पहुंचता था।

हुर्मुज पर निर्भरता कम करने के लिए खाड़ी देश नई पाइप लाइनों और बंदरगाहों के विकास पर ध्यान दे रहे हैं। सऊदी अरब अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा लाल सागर तक पहुंचाने की क्षमता बढ़ा रहा है।

इस पाइपलाइन के जरिए तेल को हुर्मुज जलडमरूमध्य से बचाकर दूसरे समुद्री रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक भेजा जा सकता है।

वहीं यूएई भी अपने तेल निर्यात के लिए वैकल्पिक मार्गों को मजबूत कर रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में सप्लाई बाधित न हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान कुछ समय तक हुर्मुज मार्ग का इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन लंबे समय तक दुनिया इस एकमात्र समुद्री रास्ते पर निर्भर नहीं रहना चाहेगी। मौजूदा संकट ने कई देशों को अपनी ऊर्जा रणनीति बदलने के लिए मजबूर किया है।

हालांकि, जानकार यह भी मानते हैं कि नए विकल्प पूरी तरह हुर्मुज की जगह नहीं ले सकते, क्योंकि इस जलडमरूमध्य की क्षमता और रणनीतिक महत्व बहुत बड़ा है।

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, आपातकालीन भंडार और वैकल्पिक सप्लाई योजनाओं की वजह से वैश्विक तेल बाजार में अभी तक बड़ी अस्थिरता नहीं दिखी है।l

सऊदी अरब जैसे देशों ने पहले ही अपने तेल निर्यात के कुछ हिस्से को वैकल्पिक पाइपलाइन नेटवर्क की ओर मोड़ना शुरू कर दिया है, ताकि भविष्य में किसी भी संकट का सामना किया जा सके।

 

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