कुवैत : अमेरिका और इस्राईल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ युद्ध छेड़ने वाले ने अब अपने नागरिकों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। कुवैत के आधिकारिक राजपत्र “अल-कुवैत अल-यौम” के परिशिष्ट में कुवैत के शासक अमीर शेख मिशाल अल-अहमद अल-जाबिर अल-सबा के उस आदेश को प्रकाशित किया गया है, जिसके तहत प्रमुख शिया धर्मगुरु आयतुल्लाह हुसैन अल-मातूक सहित छह लोगों की कुवैती नागरिकता रद्द कर दी गई है।
कुवैत के शासक के आदेश के अनुसार, जिन लोगों की नागरिकता समाप्त की गई है उनमें शेख हुसैन अब्दुल्लाह मातूक अली अल-मातूक, अब्दुलअज़ीज़ खालिद अब्दुलवहाब इस्माइल अली अल-फौदरी, लुलुवा नासिर अब्दुल्लाह अब्दुलवहाब अल-हुसैन, मोहम्मद बद्र अब्दुल्लाह सालेह मोहम्मद अल-मतर, अब्दुल्लाह मोहम्मद अब्दुल्लाह अब्दुलवहाब अल-सालेह और मंसूर अहमद हमूद अल-मुहारिब अल-हमूद शामिल हैं।
आयतुल्लाह हुसैन अल-मातूक विश्व अहल-ए-बैत (अ.) असेंबली के सदस्य रह चुके हैं और इससे पहले नेशनल इस्लामिक कोएलिशन के महासचिव का भी पद संभाल चुके हैं। इससे पहले कुवैत की अदालत ने उनके खिलाफ उन मामलों में फैसला सुनाया था, जिन्हें सरकार ने “राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले” बताया था।
अपनी नागरिकता रद्द किए जाने पर राजनीतिक विश्लेषक मोहम्मद अल-मतर ने कहा कि कुवैत अपने इतिहास के सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में उनके लिए यह फैसला चौंकाने वाला नहीं था, बल्कि उन्हें इसकी पहले से आशंका थी। अल-मतर ने आरोप लगाया कि कई परिवारों के साथ अन्याय हुआ है, उनकी नागरिकता छीन ली गई, संपत्तियां जब्त की गईं और पारिवारिक रिश्तों तक को प्रभावित किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, मानवाधिकार कार्यकर्ता लुलुवा अल-हुसैनान की भी नागरिकता रद्द की गई है उन्होंने हाल के महीनों में कुवैत के गृह मंत्री फहद अल-यूसुफ की तीखी आलोचना की थी। बताया गया है कि कुवैती अधिकारियों ने उनके परिवार के कई सदस्यों को भी हिरासत में लिया है।
वहीं, अब्दुल्लाह अल-सालेह, जिनकी नागरिकता भी समाप्त कर दी गई है, विदेश में रह रहे कुवैत के प्रमुख विपक्षी कार्यकर्ताओं में गिने जाते हैं। हालांकि उन्हें कुछ वर्ष पहले सरकारी माफी भी मिल चुकी थी।

