कुर्सी और किसान के बीच हरियाणा के विधायकों ने कुर्सी को चुना: यादव

हरियाणा: भाजपा-जेजेपी सरकार ने हरियाणा विधानसभा में कांग्रेस द्वारा इसके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में विश्वास मत जीता, जिसपर किसान नेताओं का कहना है कि इससे उनके आंदोलन पर कोई असर नहीं पड़ेगा बल्कि अब तो उनके आंदोलन और शक्ति मिलेगी।

किसान मोर्चा के सदस्य और कार्यकर्ता योगेंद्र यादव का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव की हार से किसानों के आंदोलन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि यह किसानों के गुस्से और संघर्ष को जारी रखने के उनके संकल्प को मज़बूत कर देगा।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार योगेंद्र यादव ने कहा कि हरियाणा के विधायकों के पास आज बहुत स्पष्ट विकल्प था। उन्हें कुर्सी और किसान के बीच किसी एक को चयन करना था। लेकिन उन्होंने (भाजपा-जेजेपी और उनके सहयोगियों ने) किसानों को न चुनकर कुर्सी पर बने रहने को चुना । अब मुझे यकीन है कि हरियाणा के किसान इस विश्वासघात को कभी नहीं भूलेंगे, खासकर उन लोगों द्वारा जिन्हें किसानों ने चुना था और उन विधायकों ने उनके हित में काम करने की कसम खाई थी।

हरियाणा के बीकेयू नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर इसके खिलाफ वोट करने वाले बीजेपी और उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ अब और ज़्यादा नफरत पैदा होगी। उनका विरोध अब बढ़ जाएगा। हम जनता से अपील करते हैं कि वे उन विधायकों को वोट न दें, जिन्होंने आज हरियाणा विधानसभा में किसानों के पक्ष में मतदान नहीं किया। उन्होंने कहा कि हर जगह उनका बहिष्कार किया जाना चाहिए और उन्हें गांवों में घुसने नहीं दिया जाना चाहिए।

एक वीडियो संदेश में, चढूनी ने कहा: किसानों ने मंगलवार को विधायकों को केवल एक बार वोट माँगा वो भी उन्होंने हमको नहीं दिया जबकि वो विधायक बनने के लिए हमेशा हमसे वोट मांगते हैं और हम उन्हें वोट देते हैं। लोगों को भुखमरी से बचाने और देश की आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए, हमने केवल एक बार वोट मांगा था लेकिन उन्होंने जनता के समर्थन में वोट नहीं किया बल्कि उन्होंने पूंजीवादियों के समर्थन में मतदान किया है। आपको यह ध्यान रखना होगा कि जो लोग आपके नहीं हैं, आप भविष्य में कभी भी उनका समर्थन नहीं करेंगे।

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