युद्ध-विराम और वित्तीय सहायता के बाद भी इज़रायली वापस क्यों नहीं लौट रहें?
इज़रायल- लेबनान के बीच युद्ध-विराम समझौता लागू होते ही लेबनानी नागरिक तुरंत अपने अपने घरों को वापस होने लगे। सभी नागरिकोण के हाथों में हिज़्बुल्लाह का झंडा और उनके महान लीडर सैयद हसन नसरुल्लाह की तस्वीर थी। उन्होंने इस बात का भी इंतेज़ार नहीं किया कि, अभी-अभी युद्ध विराम हुआ हुआ है। कुछ दिन और रुक जाएं और जब हालात बिलकुल सामान्य हो जाएं तब अपने घरों को लौट जाएं।
लेबनानी नागरिकों ने हिज़्बुल्लाह के झंडे और सैयद हसन नसरुल्लाह की तस्वीरें अपने साथ लेकर घर लौटने की प्रक्रिया को और भी महत्वपूर्ण बना दिया। यह न केवल उनके संघर्ष के प्रतीक के रूप में देखा गया, बल्कि यह एक संदेश भी था कि हिज़्बुल्लाह का समर्थन और उनका नेतृत्व इस युद्ध में लेबनानियों के लिए महत्वपूर्ण था। हिज़्बुल्लाह की ताकत, जिसे अक्सर एक राजनीतिक और सैन्य संगठन के रूप में देखा जाता है, इस युद्ध के दौरान उनके नेतृत्व में न केवल लेबनानी नागरिकों को एकजुट किया, बल्कि उनकी सैन्य शक्ति ने इज़रायली सेना के खिलाफ प्रतिरोध भी प्रदर्शित किया।
इसके बिल्कुल विपरीत इज़रायली नागरिक युद्ध के डर से अपने घरों को अभी तक वापस नहीं लौटे हैं। उनको इस बात का डर है कि, नेतान्यहू युद्ध-विराम का उल्लंघन कर दुबारा इस इलाक़े में अशांति फैला सकते हैं। इसीलिए वह अपने घरों की तरफ लौटने के लिए तैयार नहीं हैं। इज़रायली नागरिकों को वापस लाने के लिए इज़रायल ने घर वापसी के लिए वित्तीय सहायता की योजना बनाई है।
युद्ध के बाद के माहौल में, जहां इज़रायली नागरिक डर के कारण घरों की ओर लौटने में हिचकिचा रहे हैं, लेबनानी नागरिकों का हिज़्बुल्लाह के प्रति समर्थन और विश्वास उनके लिए सुरक्षा और स्वाभिमान का प्रतीक बन गया है। हिज़्बुल्लाह की तस्वीरें और उनके झंडे के साथ नागरिकों का घर लौटना इस बात को दर्शाता है कि हिज़्बुल्लाह के लिए संघर्ष केवल एक सैन्य जंग नहीं, बल्कि एक देशभक्ति और जनसंघर्ष का प्रतीक है।
इज़रायली नागरिकों का अपने घरों की ओर लौटने से इनकार करना एक और गहरी राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है। नेतन्याहू के नेतृत्व में इज़रायल में यह डर है कि युद्ध-विराम समझौते के बावजूद इज़रायली सेना फिर से लेबनान में अशांति फैला सकती है। यह इज़रायली नागरिकों के मानसिकता में एक गहरी असुरक्षा और विश्वास की कमी को भी प्रकट करता है। नेतान्याहू की नीति और उनके फैसलों पर सवाल उठाते हुए, इज़रायली नागरिकों ने यह महसूस किया कि उनका नेता उनके सुरक्षा और भविष्य को सुनिश्चित करने में सक्षम नहीं है।
जहां एक ओर लेबनान के नागरिकों ने युद्ध के बाद शांति की ओर कदम बढ़ाए, वहीं इज़रायली नागरिकों का डर और असमर्थता यह दिखाती है कि युद्ध के परिणाम न केवल भौतिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी गहरे असर डालते हैं। इज़रायली सरकार ने घर लौटने के लिए वित्तीय मदद की घोषणा की है, लेकिन इस प्रक्रिया की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार नागरिकों के डर और असुरक्षा को कैसे संबोधित करती है। हिज़्बुल्लाह द्वारा अपना नेतृत्व स्थापित करने और नेतान्याहू के नेतृत्व में असहमति इस बात का संकेत है कि इज़रायल में भविष्य में और संघर्ष हो सकता है।
घर वापसी योजना के तहत, उम्मीद की जा रही थी कि, इज़रायली निवासी 1 फरवरी से अपने परिवार की संख्या के आधार पर वित्तीय सहायता के साथ देश लौटेंगे। एक औसत परिवार, जिसमें दो माता-पिता और चार बच्चे हैं, लगभग 60,000 शेकेल का पुनर्वास सहायता प्राप्त करेंगे, जबकि बिना बच्चों वाले एक जोड़े को 20,000 से 25,000 शेकेल, यानी लगभग 5,500 से 7,000 डॉलर मिलेगा। जितना अधिक समय कोई व्यक्ति या परिवार घर लौटने में लगाएगा, उतनी ही कम राशि उसे मिलेगी, क्योंकि सरकार उनके होटल या किराए के अपार्टमेंट में रहने का खर्च उठाएगी।
वापसी धीरे-धीरे 1 जुलाई तक, यानी स्कूल वर्ष के अंत तक होगी, जब सरकार प्रभावित परिवारों के पुनर्निर्माण में मदद करेगी। जिन निवासियों के घर नष्ट हो गए हैं, जैसे कि मच्छल और नहारीया में, उन्हें मौजूद मुआवजा निधि के अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जाएगी। सरकार निवासियों के घरों के निर्माण या पुनर्निर्माण तक वित्तीय सहायता प्रदान करेगी और पुनर्निर्माण प्रक्रिया के लिए एक निश्चित समयसीमा तय करेगी।
आकलन से बड़े पैमाने पर नुकसान का अनुमान लगाया गया है: 500 से अधिक घर पूरी तरह से नष्ट हो गए और लगभग 1,000 अन्य घरों को विभिन्न स्तरों पर क्षति पहुंची। नष्ट हुए भवनों की पुनर्निर्माण लागत लगभग 1.5 अरब शेकेल और पुनर्निर्माण की कुल लागत करीब 2 अरब शेकेल है। इसके अलावा, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे जैसे सड़कें, बाग़-बग़ीचे और बाड़ों के पुनर्निर्माण के लिए और निवेश की आवश्यकता होगी। यह योजना प्रभावित निवासियों को न्यायपूर्ण और समग्र रूप से सहायता देने के साथ-साथ सामान्य जीवन की बहाली पर भी जोर देती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए IscPress उत्तरदायी नहीं है।