बीजिंग का आदेश, इस्लामिक ड्रेस कोड का पालन करें चीनी नागरिक अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के बाद से ही विश्व जगत में विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है।
बीजिंग और मास्को को तालिबान समर्थक के रूप में बताया जा रहा है। ब्रिटेन के विदेश मंत्री भी कह चुके हैं कि मास्को और बीजिंग से मतभेद एवं अविश्वास पूर्ण संबंधों के बावजूद भी हमें तालिबान के मुद्दे पर इन दोनों देशों पर निर्भर रहना होगा।
अब खबर आ रही है कि चीन ने तालिबान को खुश करने वाला निर्णय लेते हुए अफगानिस्तान में मौजूद चीनी नागरिकों को सख्ती से इस्लामिक ड्रेस कोड एवं अन्य नियमों का पालन करने की सलाह दी है।
काबुल में चीनी दूतावास ने अफगानिस्तान में मौजूद अपने नागरिकों को इस्लामी रीति-रिवाजों का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है। इस एडवाइजरी में ड्रेस कोड से लेकर सार्वजनिक रूप से भोजन करने को लेकर भी जागरूक किया गया है।
ग्लोबल टाइम्स ने रिपोर्ट देते हुए कहा है कि चीनी दूतावास की ओर से जारी एडवाइजरी में सभी चीनी नागरिकों को सुझाव दिया गया है कि वह काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट एवं अन्य अराजक स्थानों से दूरी बनाकर रखें।
याद रहे कि पिछले महीने चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने तियानजिन शहर में तालिबान प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी। उन्होंने तालिबान प्रतिनिधिमंडल से बात करते हुए कहा था कि अफगानिस्तान एक उदारवादी इस्लामी नीति अपना सकता है।
तालिबान प्रवक्ता ने कहा है कि अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में योगदान देने के लिए चीन का स्वागत किया जाएगा। चीन ने अफगानिस्तान में शांति और सुलह को बढ़ावा देने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाई है।
चीन ने कहा है कि अफगानिस्तान को फिर से आतंकवाद का अड्डा नहीं बनने देना चाहिए। गृहयुद्ध का सामना करते इस देश को तालिबान के सत्ता में आने के बाद इस संकट से निकालने का समर्थन किया जाना चाहिए।
चीन अफगानिस्तान और तालिबान से दोस्ती बढ़ाने में जुटा है। वह जहां एक ओर इस देश की खनिज संपदा को लेकर तालिबान से नजदीकी बढ़ा रहा है वही वह पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट को लेकर भी चिंतित है।
संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान में तालिबान के फिर से काबिज होते ही पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट से जुड़े सैकड़ों लड़ा के अफगानिस्तान में जमा हो रहे हैं।