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ट्रंप का नया दावा: ईरान ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से “मीडिया युद्ध” शुरू किया है

ट्रंप का नया दावा: ईरान ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से “मीडिया युद्ध” शुरू किया है

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, ऊट पटांग और आधारहीन बयान देने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने एक बार फिर अटपटा बयान देते हुए दावा किया है कि, ईरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपकरणों का इस्तेमाल करके और अमेरिकी मीडिया के साथ समन्वय कर, अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ कथित सफल सैन्य हमलों के नकली दृश्य तैयार कर रहा है।

इतना ही नहीं, ट्रंप ने दुनिया के मुख्यधारा के मीडिया को भी “गद्दार” तक कह दिया और Federal Communications Commission द्वारा कुछ मीडिया संस्थानों के लाइसेंस रद्द करने की जांच के विचार का समर्थन किया। आलोचकों का कहना है कि यह मीडिया की आवाज दबाने की कोशिश है।

उन्होंने USS Abraham Lincoln विमानवाहक पोत पर हमले या अमेरिकी ईंधन-भरने वाले विमानों को गिराए जाने से जुड़ी खबरों का हवाला देते हुए कहा कि ये सभी खबरें झूठी हैं और एआई से बनाई गई हैं। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ये सैन्य उपकरण पूरी तरह सुरक्षित और सक्रिय स्थिति में हैं।

लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप के इन दावों पर कई सवाल खड़े होते हैं। अगर सचमुच कोई हमला नहीं हुआ और सब कुछ सामान्य था, तो फिर अमेरिका ने अपने सबसे बड़े युद्धपोतों में से एक अब्राहम लिंकन की दिशा क्यों बदली और उसे क्षेत्र से दूर क्यों किया?

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने इस विमानवाहक पोत और उसके साथ मौजूद युद्धपोतों को पहले दक्षिण चीन सागर से हटाकर मध्य-पूर्व की ओर भेजा था, ताकि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच सैन्य दबाव बनाया जा सके।

आलोचकों का कहना है कि ट्रंप के बयान खुद उनके कदमों से मेल नहीं खाते। एक तरफ वह कहते हैं कि ईरान की खबरें “झूठी” हैं, दूसरी तरफ अमेरिका लगातार युद्धपोत और सैन्य ताकत क्षेत्र में भेज रहा है और अपनी रणनीति बदल रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान अक्सर घरेलू राजनीतिक दबाव और असफलताओं से ध्यान हटाने की कोशिश होते हैं। उनका कहना है कि बिना ठोस सबूत के ऐसे बड़े आरोप लगाना अंतरराष्ट्रीय माहौल को और तनावपूर्ण बना सकता है।

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