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ईरान ने साबित कर दिया कि, वह एक दृढ़ और अजेय शक्ति है: अराक़ची 

ईरान ने साबित कर दिया कि, वह एक दृढ़ और अजेय शक्ति है: अराक़ची 

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराक़ची ने आज कहा कि, हालिया युद्ध में इस्लामी गणराज्य ईरान ने पूरी दुनिया के सामने अपनी ताकत और दृढ़ता साबित की है। उन्होंने कहा कि ईरान ने दिखा दिया कि, वह एक ऐसी शक्ति है जिसे दबाना या पराजित करना आसान नहीं है।

अराक़ची ने मंगलवार को ‘कूटनीति और स्वास्थ्य के बीच सहयोग एवं समन्वय’ विषय पर आयोजित एक बैठक को संबोधित करते हुए हालिया युद्ध के दौरान शहीद हुए लोगों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने विशेष रूप से स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े उन डॉक्टरों, नर्सों और चिकित्सा कर्मचारियों को याद किया, जिन्होंने भीषण बमबारी के बावजूद मरीजों और घायलों का इलाज जारी रखा।

उन्होंने कहा कि हालिया 12 दिवसीय और 40 दिवसीय युद्धों में ईरानी जनता ने आठ वर्षीय युद्ध की तरह अद्भुत साहस, बलिदान और एकजुटता का प्रदर्शन किया। देश के अलग-अलग क्षेत्रों में महिलाओं और पुरुषों ने अपनी जिम्मेदारियां निभाईं और यह सुनिश्चित किया कि युद्ध के बावजूद लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, स्वास्थ्य और चिकित्सा सेवाएं बाधित न हों।

विदेश मंत्री ने दावा किया कि ईरानी सशस्त्र बलों ने अपने साहस और बलिदान के बल पर दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्तियों में से एक को चुनौती दी और उसे पीछे हटने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा कि यह केवल कोई राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि ऐसी वास्तविकता है जिसे दुनिया के कई देश स्वीकार कर रहे हैं।

अराक़ची ने कहा कि कई देशों के विदेश मंत्रियों और अधिकारियों ने उनसे कहा कि ईरान ने पूरी दुनिया को आश्चर्यचकित कर दिया। उनके अनुसार, किसी को उम्मीद नहीं थी कि ईरान अमेरिका, इस्राईल और उनके समर्थक देशों के दबाव के बावजूद इतनी मजबूती से प्रतिरोध करेगा और अंततः दुश्मन को बातचीत की मांग करने के लिए मजबूर कर देगा।

उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने युद्ध के पहले दिन ईरान से “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग की थी, लेकिन कुछ ही समय बाद वही पक्ष बातचीत की ओर बढ़ने के लिए मजबूर हुआ।

अराक़ची ने कहा कि ईरान ने कूटनीतिक मोर्चे पर भी अपने अधिकारों की प्रभावी ढंग से रक्षा की। उन्होंने बताया कि कई विदेशी अधिकारियों ने उनसे कहा कि ईरान ने “युद्ध भी जीता और कूटनीति भी।”

विदेश मंत्री ने चिकित्सा क्षेत्र के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय ने स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और आवश्यक तकनीक की आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद की।

अराक़ची के अनुसार, युद्ध के दौरान और उसके बाद विदेशों में रहने वाले ईरानियों, शियाओं, मुसलमानों और इस्लामी क्रांति के समर्थकों ने बड़ी मात्रा में आर्थिक और चिकित्सा सहायता भेजी। उन्होंने बताया कि, एक पड़ोसी देश से एक ही बार में 25 एंबुलेंस भी भेजी गईं।

कार्यक्रम के अंत में युद्ध में क्षतिग्रस्त स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के बीच सहयोग समझौते पर विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराक़ची और स्वास्थ्य मंत्री मोहम्मद रज़ा ज़फ़रकंदी ने हस्ताक्षर किए।

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