जॉर्डन में धमाकों की खबर, अमेरिकी ठिकाने पर ईरानी मिसाइल हमले का दावा
फ़ार्स इंटरनेशनल समाचार एजेंसी ने कहा है कि, अरब सूत्रों ,ने जॉर्डन के दक्षिण में स्थित अक़बा क्षेत्र में कई धमाकों की खबर दी है। इसके अलावा, पूर्वी जॉर्डन में स्थित मुवफ़्फ़क़ अस-सलती एयरबेस पर भी कई धमाकों की सूचना मिली है। जॉर्डन के आसमान में अमेरिकी वायु-रक्षा प्रणाली द्वारा ईरानी मिसाइलों का सामना करने की कोशिश की जा रही है।
हमें ईरान के मिसाइल हमलों का निशाना बनाया गया: अमेरिकी अधिकारी
एक अमेरिकी अधिकारी ने फ़ॉक्स न्यूज़ से बातचीत में कहा कि जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डा ईरान के मिसाइल हमलों का निशाना बना है। हालांकि, उन्होंने आगे अमेरिकी सेना की ओर से अपनाई जा रही इनकार और सेंसरशिप की नीति को जारी रखते हुए दावा किया कि, “ईरान के हमलों में हमारे सैनिकों को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ और सभी मिसाइलों को रोक लिया गया।”
ईरानी मिसाइलों और ड्रोन से हमला
‘आक्रमणकारियों को दंड देने’ के अभियान में ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रक्षेपण के अभियान समय कोड ‘या मुहम्मद इब्ने अब्दुल्लाह (स.)’ था। इस अभियान का निशाना जॉर्डन में स्थित दो अमेरिकी वायुसेना अड्डों—किंग हुसैन एयरबेस और अल-अज़रक एयरबेस—पर मौजूद तकनीकी एवं मरम्मत संबंधी बुनियादी ढाँचे तथा दुश्मन के लड़ाकू विमानों के ठिकाने थे।
जॉर्डन अब भी इनकार कर रहा है
जॉर्डन ने भी अमेरिकी सेना की इनकार और सेंसरशिप की नीति के अनुरूप दावा किया है कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में 8 ईरानी मिसाइलों को रोक लिया। जॉर्डन की सेना ने भी रमज़ान युद्ध के दौरान जारी किए गए अपने बयानों की तरह दावा किया कि, ये मिसाइलें अपने लक्ष्यों तक नहीं पहुँच सकीं।
ऐसे दावे उस समय किए जा रहे हैं जब जॉर्डन कई बार अपने क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी तक से इनकार कर चुका है और ईरानी मिसाइलों के किसी भी लक्ष्य पर गिरने की खबर को लगातार ख़ारिज करता रहा है।
जॉर्डन के अधिकारियों ने उस समय भी अपने देश में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी से इनकार किया था, जब वॉशिंगटन ने स्वयं जॉर्डन में अपने सैनिकों के हताहत होने की बात स्वीकार की थी।

