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बेन-गवीर की धमकी के बाद, हमास कमांडर हसन सलामेह को जेल की कोठरी में मारी गईं नौ गोलियां, हालत गंभीर

बेन-गवीर की धमकी के बाद, हमास कमांडर हसन सलामेह को जेल की कोठरी में मारी गईं नौ गोलियां, हालत गंभीर

इस्राईली जेल में बंद हमास की सैन्य शाखा इज़्ज़ुद्दीन अल-क़स्साम ब्रिगेड के वरिष्ठ कमांडर हसन सलामेह पर कथित तौर पर जानलेवा हमला किया गया है। उनकी मंगेतर और लेखिका ग़ुफ़रान अल-जमील के मुताबिक, इस्राईली जेल सुरक्षाकर्मियों ने उनकी एकांत कारावास वाली कोठरी में उन पर नौ गोलियां चलाईं। इस हमले में सलामेह गंभीर रूप से घायल हुए हैं और उनकी हालत बेहद नाज़ुक बनी हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना 28 सितंबर को हुई थी। इसी दिन इस्राईल के कट्टर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर हथियारबंद सुरक्षाकर्मियों के साथ गनोट जेल पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने हथकड़ियों में जकड़े सलामेह को धमकी देते हुए कहा था, “मैं तुम्हें मारना चाहता हूं और फांसी देना चाहता हूं।” इसके बाद जेल सुरक्षाकर्मियों ने उनकी पिटाई की और उन पर नौ गोलियां चलाईं।

ग़ुफ़रान अल-जमील और फ़िलिस्तीनी कैदी अधिकार संगठनों के अनुसार, गोली लगने के बाद सलामेह की तस्वीरें लेकर उनकी चोटों का दस्तावेजीकरण तो किया गया, लेकिन उन्हें समुचित चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई। कथित तौर पर केवल सामान्य दर्द निवारक दवाएं देकर उन्हें वापस कोठरी में भेज दिया गया। 2 नवंबर को एक वकील ने उनसे मुलाकात की और उनकी बिगड़ती शारीरिक स्थिति की पुष्टि की। वकील के मुताबिक, वह अत्यधिक थके हुए थे और लगातार गंभीर दर्द से पीड़ित थे।

1971 में ग़ाज़ा के ख़ान यूनिस शरणार्थी शिविर में जन्मे सलामेह 1996 से इस्राईली जेल में बंद हैं। उन पर क़स्साम ब्रिगेड के कमांडर याह्या अय्याश की हत्या के बाद जवाबी अभियानों की योजना बनाने का आरोप लगाया गया था। उन्हें 48 आजीवन कारावास की सजाएं सुनाई गई थीं। अपने लगभग 30 साल के कारावास में उन्होंने करीब 15 साल एकांत कारावास में बिताए हैं।

फ़िलिस्तीनी संगठनों ने आरोप लगाया है कि इस्राईली जेलों में कैदियों को यातना देने, भूखा रखने और चिकित्सा सुविधाओं से वंचित करने की सुनियोजित नीति अपनाई जा रही है। उनके अनुसार, सलामेह पर हमला इसी का एक उदाहरण है।

बेन-गवीर पर जेलों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार के लिए करने और फ़िलिस्तीनी कैदियों की जिंदगी कठिन बनाने का आरोप भी लगता रहा है। फ़िलिस्तीनी संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप कर कैदियों की सुरक्षा और रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस्राईली जेलों में लगभग 10 हजार फ़िलिस्तीनी कैदी बंद हैं, जिनमें कई बिना आरोप या मुकदमे के हिरासत में रखे गए हैं।

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