इमरान खान की गिरफ्तारी की तीसरी बरसी पर पाकिस्तान में उग्र प्रदर्शन; 100 से अधिक समर्थक गिरफ्तार
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ्तारी की तीसरी बरसी के अवसर पर देशभर में आयोजित विरोध प्रदर्शनों के दौरान 100 से अधिक समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया गया।
फ़ार्स समाचार एजेंसी की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार शाम “इमरान खान को रिहा करो” के नारों के साथ निकाली गई रैलियों के दौरान रावलपिंडी में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे। इस दौरान कई स्थानों पर झड़पें हुईं और सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए।
मुख्य प्रदर्शन ख़ैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर में आयोजित किया गया, जहां इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की सरकार है। पार्टी ने इमरान खान की तत्काल रिहाई और उनके राजनीतिक एवं संवैधानिक अधिकारों की बहाली की मांग की।
अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद हजारों समर्थक प्रदर्शन में शामिल हुए।
स्थानीय मीडिया के मुताबिक, पंजाब प्रांत में पाकिस्तान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया और लाहौर, मियांवाली तथा रावलपिंडी में पीटीआई के दर्जनों कार्यकर्ताओं और नेताओं को गिरफ्तार कर लिया।
लाहौर की प्रसिद्ध मॉल रोड पर भी पुलिस ने इमरान खान की रिहाई की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया और कई लोगों को हिरासत में ले लिया।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि रैपिड रिस्पॉन्स फोर्स (आरआरएफ) के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए बल प्रयोग किया।
कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि प्रदर्शन की कवरेज कर रहे कई पत्रकारों के साथ भी पुलिस ने मारपीट की, जिससे मीडिया संगठनों ने कड़ी नाराज़गी जताई है।
पंजाब में पीटीआई के महासचिव चौधरी बिलाल एजाज़ ने बताया कि लाहौर में गिरफ्तार किए गए 25 लोगों में उनकी पार्टी के पांच सांसद भी शामिल हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को वर्ष 2022 में सत्ता से हटाए जाने के बाद कई कानूनी मामलों का सामना करना पड़ा। अगस्त 2023 में उन्हें लाहौर स्थित उनके आवास से पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जब तोशाखाना मामले में एक अदालत ने उन्हें भ्रष्टाचार का दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष की कैद और जुर्माने की सज़ा सुनाई थी।
इसके बाद से इमरान खान विभिन्न अदालतों में 100 से अधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। इन मामलों में भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग, सरकारी गोपनीय दस्तावेज़ों के खुलासे तथा अन्य आरोप शामिल हैं। हालांकि, उनकी पार्टी और उनके सहयोगियों का कहना है कि ये सभी मुकदमे राजनीतिक उद्देश्य से दर्ज किए गए हैं और उनका मकसद इमरान खान को राजनीति से बाहर करना है।
जनवरी 2025 में एक भ्रष्टाचार निरोधक अदालत ने अल-क़ादिर फ़ाउंडेशन से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में इमरान खान को 14 वर्ष की कैद की सज़ा सुनाई। इमरान खान ने इन सभी आरोपों से इनकार करते हुए इस फैसले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया।
इसके बाद दिसंबर 2025 में इस्लामाबाद की एक अन्य अदालत ने तोशाखाना-2 मामले में इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को 17-17 वर्ष के कारावास तथा आर्थिक जुर्माने की सज़ा सुनाई।

