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इमरान सरकार ने टीएलपी के आगे घुटने टेके, खुफिया समझौते पर सहमति

इमरान सरकार ने टीएलपी के आगे घुटने टेके, खुफिया समझौते पर सहमति तहरीके लब्बैक पाकिस्तान की ओर से देश भर में कई दिनों से जारी है विरोध प्रदर्शन एवं में हिंसा के बाद पाकिस्तान सरकार इस संगठन के आगे कमजोर पड़ गई है।

इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान सरकार कट्टरपंथी तहरीके लब्बैक पाकिस्तान के आगे घुटने टेक चुकी है और दोनों के बीच धरने प्रदर्शन एवं हिंसा का दौर खत्म करने के लिए सहमति बन गई है।

कहा जा रहा है कि पाकिस्तान सरकार और तहरीके लब्बैक पाकिस्तान के बीच हुई डील के बाद सरकार टीएलपी के 860 कार्यकर्ताओं को रिहा कर चुकी है और किसी भी कार्यकर्ता के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं रहेगा जिनके खिलाफ मुकदमा दर्ज भी हुए थे सब रद्द कर दिए जाएंगे। पाकिस्तानी गृह मंत्रालय ने भी इन हमलों की पुष्टि की है।

तहरीके लब्बैक पाकिस्तान और सरकार के बीच हुई डील के तहत इस संगठन से मांग की गई है कि वह पाकिस्तान में कहीं भी हिंसक प्रदर्शन जारी नहीं रखेगा। तमाम प्रदर्शन खत्म किए जाएंगे बदले में सरकार उसके 860 कार्यकर्ताओं को रिहा कर रही है।

याद रहे कि फ्रांस में पैगंबर साहब के अपमानजनक कार्टून से उपजे विवाद के बाद तहरीके लब्बैक पाकिस्तान ने पूरे पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन किए थे। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रॉन ने पैगंबर साहब के कार्टून को क्लास में दिखाया जाने की घटना को अभिव्यक्ति की आजादी बताया था। पाकिस्तान में इसके बाद से ही तहरीके लब्बैक ने अपने विरोध प्रदर्शन शुरू करते हुए पाकिस्तान सरकार से मांग की थी कि फ्रांस के राजदूत को देश से बाहर निकाल दे।

तहरीक ने अपनी मांग को लेकर अप्रैल से ही पाकिस्तान में उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिए थे जिसके बाद हिंसा भड़क गई थी। उग्र प्रदर्शनों के बाद भड़की हिंसा को देखते हुए पाकिस्तान पुलिस ने टीएलपी प्रमुख साद रिज़वी के साथ बहुत से कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया था।

साद रिज़वी की रिहाई को लेकर बीते दिनों फिर पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन शुरू किए जो बाद में हिंसक हो गए थे और अब तक इसमें 21 लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें से 10 पुलिसकर्मी और 11 टीएलपी समर्थक शामिल हैं।

इससे पहले पाकिस्तान सरकार ने टीएलपी के 350 कार्यकर्ताओं को रिहा किया था और तहरीके लब्बैक से समझौते के बाद अब 860 कार्यकर्ताओं को रिहा किया जा रहा है ।

टीएलपी और इमरान सरकार के बीच भले ही ही समझौता हो गया हो और भले ही इमरान सरकार ने 860 टीएलपी कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया हो लेकिन ऐसा लगता नहीं कि पाकिस्तान में यह विरोध प्रदर्शन जल्दी खत्म हो जाएंगे। टीएलपी की मांग है कि उसके सभी कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए।

टीएलपी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे मुल्ला मुनीब उर रहमान ने कहा है कि हम लाहौर से 150 किलोमीटर दूर वजीराबाद में अपना धरना प्रदर्शन तब तक जारी रखेंगे जब तक हमारे एक एक कार्यकर्ता को आजाद नहीं किया जाता।

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