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मध्य पूर्व की सबसे बड़ी ताकत अमेरिका या इस्राईल नहीं बल्कि ईरान 

वाशिंगटन: अमेरिकी मीडिया ‘द अटलांटिक’ ने दावा किया है कि मध्य पूर्व में शक्ति का संतुलन अब पूरी तरह बदल गया है और ईरान क्षेत्र की सबसे प्रभावशाली ताकत बनकर सामने आया है।

अमेरिकी पत्रिका द अटलांटिक ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि कई वर्षों तक ईरान को मध्य पूर्व में ऐसे शक्ति संतुलन का सामना करना पड़ा, जो उसके खिलाफ था। इस क्षेत्र में अमेरिका का दबदबा था, इस्राईल के पास परमाणु हथियार और मजबूत सैन्य क्षमता थी। इसके अलावा मिस्र, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रीय देश भी रणनीतिक और आर्थिक रूप से अमेरिका के करीब थे।

रिपोर्ट के अनुसार, आज ईरान की स्थिति पहले से बिल्कुल अलग है। ईरान ने अमेरिका और इस्राईल के साथ सीधे टकराव का सामना किया, उनके अत्याधुनिक हथियारों से हुए भारी हमलों को झेला और इसके बावजूद न केवल टिके रहने में कामयाब रहा, बल्कि कई मामलों में अपनी क्षमता का प्रदर्शन भी किया।

द अटलांटिक के मुताबिक, इसका नतीजा यह हुआ है कि मध्य पूर्व और फारस की खाड़ी में शक्ति का पूरा ढांचा बदल गया है। रिपोर्ट का दावा है कि अब इस क्षेत्र की प्रमुख शक्ति अमेरिका या इस्राईल नहीं, बल्कि ईरान होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पड़ोसी देश पहले से ही इस नई वास्तविकता के अनुसार अपनी रणनीतियां बदल रहे हैं और दूर स्थित शक्तियों को भी आगे चलकर इसी स्थिति के अनुसार अपनी नीतियां तय करनी पड़ सकती हैं।

अमेरिकी मीडिया ने आगे दावा किया कि ईरान को अमेरिका के साथ किसी समझौते की जरूरत नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, यह धारणा गलत साबित हुई है कि कमजोर और आर्थिक संकट से जूझ रहा ईरान अंततः अमेरिकी दबाव के सामने झुक जाएगा, हुर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोल देगा और अपनी बुरी तरह प्रभावित अर्थव्यवस्था को फिर से सुधारने में लग जाएगा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पिछले दो वर्षों की तुलना में इस समय ईरान को कमजोर या असुरक्षित मानना सही तस्वीर पेश नहीं करता।

‘द अटलांटिक’ का आकलन है कि पश्चिम एशिया में शक्ति का संतुलन तेजी से ईरान के पक्ष में बदल रहा है और क्षेत्र के देश इस नई स्थिति के अनुसार अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं।

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