हमने ईरान को एक विस्तृत और स्वीकार्य योग्य प्रस्ताव दिया है: व्हाइट हाउस
व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी कर यह दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान को परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक “विस्तृत और स्वीकार्य” प्रस्ताव दिया है। इस प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ ने तैयार किया और ओमान के विदेश मंत्री के माध्यम से तेहरान पहुँचाया गया।
इस प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से “व्यापक” बताया गया है, हालांकि न्यूयॉर्क टाइम्स ने इसके विपरीत रिपोर्ट दी है। अखबार के अनुसार, यह कोई पूर्ण परमाणु समझौते का मसौदा नहीं है, बल्कि बिंदुवार संक्षिप्त सुझावों का एक दस्तावेज़ है। इनमें सबसे विवादास्पद बिंदु ईरान से यूरेनियम संवर्धन (enrichment) की सभी गतिविधियों को पूरी तरह से बंद करने की मांग है, जो ईरान के लिए एक संवेदनशील और आत्मनिर्भरता से जुड़ा मुद्दा है।
इसके अतिरिक्त, अमेरिका इस दस्तावेज़ में क्षेत्रीय परमाणु ऊर्जा गठबंधन (Regional Nuclear Energy Coalition) का प्रस्ताव भी दे रहा है, जिसमें संभवतः अरब देशों को शामिल कर, ऊर्जा सहयोग के बहुपक्षीय ढांचे का सुझाव रखा गया है।
ईरान की ओर से अब तक इस प्रस्ताव पर कोई अंतिम रुख नहीं दिया गया है। विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराक़ची ने कहा कि ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसेइदी प्रस्ताव के साथ तेहरान आए और इसे पेश किया गया। ईरान का कहना है कि इस पर राष्ट्रीय हितों, सिद्धांतों और जनता के अधिकारों के अनुसार उचित प्रतिक्रिया दी जाएगी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब 2015 के जॉइंट कॉम्प्रिहेन्सिव प्लान ऑफ़ एक्शन (JCPOA) यानी ईरान परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने की सारी कोशिशें पिछले वर्षों में निष्फल रही हैं। अमेरिका 2018 में इस समझौते से बाहर हो चुका था और ईरान ने इसके बाद कई परमाणु प्रतिबंधों को दरकिनार करते हुए संवर्धन की गति तेज़ कर दी थी।
इस नए प्रस्ताव को अमेरिका की ओर से एक “फेवरबिल ऑफर” (अनुकूल प्रस्ताव) बताया गया है, लेकिन ईरान की दृष्टि से यह शायद रणनीतिक दबाव और आंतरिक संप्रभुता पर हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है। अब निगाहें ईरान की प्रतिक्रिया और संभावित यूरोपीय मध्यस्थता की भूमिका पर टिकी हैं, जो इस संकट को आगे बढ़ने या टालने में निर्णायक हो सकती है।

