अमेरिका भारत को एमएच-60आर मल्टी मिशन हेलीकॉप्टर उपकरणों की बिक्री करेगा
बाइडेन प्रशासन ने सोमवार को कांग्रेस को एमएच-60आर मल्टी मिशन हेलीकॉप्टर उपकरणों और उससे संबंधित सामग्री की बिक्री की मंजूरी देने के अपने निर्णय से अवगत कराया, जिसकी अनुमानित लागत 1.17 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। यह निर्णय बाइडेन प्रशासन ने सोमवार को कांग्रेस को सूचित किया, जिसमें बताया गया कि अमेरिका भारत को एमएच-60आर मल्टी मिशन हेलीकॉप्टर उपकरणों और उनसे संबंधित सामग्री की बिक्री करेगा।
इस प्रस्तावित बिक्री का कुल अनुमानित मूल्य 1.17 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। यह सौदा भारत की पनडुब्बी विरोधी युद्धक क्षमता को मजबूती देने में मदद करेगा, जिससे वह आने वाले समय में अपनी सुरक्षा चुनौतियों का अधिक प्रभावी तरीके से मुकाबला कर सकेगा।
डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने एक आधिकारिक नोटिफिकेशन में कहा कि यह प्रस्तावित बिक्री भारत की मौजूदा और भविष्य की सैन्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उसकी क्षमता को सशक्त बनाएगी। खासकर पनडुब्बी विरोधी युद्धक क्षमताओं में सुधार होगा, जो समुद्री सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
बाइडेन प्रशासन द्वारा भारत को यह रक्षा सामग्री बेचने की मंजूरी, अमेरिका और भारत के बीच रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह निर्णय बाइडेन के राष्ट्रपति पद की चार साल की अवधि समाप्त होने से कुछ सप्ताह पहले लिया गया है, जबकि नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 20 जनवरी 2025 को संयुक्त राज्य अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेने वाले हैं।
नोटिफिकेशन के अनुसार, भारत ने 30 मल्टी-फंक्शनल इंफॉर्मेशन डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम (MIDS)-जॉइंट टेक्टिकल रेडियो सिस्टम (JTRS) खरीदने की मांग की है। इन सिस्टम्स के जरिए भारत को उन्नत डेटा ट्रांसफर क्षमताएं प्राप्त होंगी, जिससे उसके सैन्य संचालन में बेहतर संचार और इंटेलिजेंस शेयरिंग की सुविधा होगी।
इसके अलावा, इस सौदे में बाहरी ईंधन टैंक, एएन/एएएस 44सी(वी) फॉरवर्ड लुकिंग इंफ्रारेड (FLIR) सिस्टम, ऑपरेटर मशीन इंटरफेस सहायक, स्पेयर कंटेनर्स, और सपोर्ट और टेस्ट उपकरण जैसे महत्वपूर्ण उपकरण भी शामिल हैं। इन उपकरणों की मदद से भारतीय सेना अपने मिशन की सफलता को सुनिश्चित कर सकेगी, चाहे वह समुद्र में पनडुब्बियों का पीछा करने के लिए हो या अन्य उच्च-जोखिम वाले अभियानों के लिए।
इस सौदे के प्रमुख ठेकेदार लॉकहीड मार्टिन रोटरी और मिशन सिस्टम्स होंगे, जो इन हेलीकॉप्टरों के निर्माण और तकनीकी समर्थन के जिम्मेदार होंगे। इस सौदे के कार्यान्वयन के लिए, अमेरिकी सरकार या ठेकेदार के 25 प्रतिनिधियों को भारत में यात्रा करनी होगी, ताकि वे तकनीकी सहायता और प्रशासनिक निगरानी सुनिश्चित कर सकें। इस प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भारत को प्राप्त होने वाले उपकरणों और सिस्टम्स की स्थापना और संचालन में कोई कठिनाई न हो।
यह सौदा भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सैन्य उन्नति को दर्शाता है और इसे दक्षिण एशिया में सुरक्षा सहयोग के दृष्टिकोण से एक अहम कदम माना जा रहा है।