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अमेरिकी नौसैनिक बेड़ों की मौजूदगी, सिर्फ़ मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन: IRGC चीफ

अमेरिकी नौसैनिक बेड़ों की मौजूदगी, सिर्फ़ मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन: IRGC चीफ

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडर-इन-चीफ के उप प्रमुख सरदार अहमद वहीदी ने हालिया प्रचार को खारिज करते हुए कहा कि, अमेरिकी नौसैनिक बेड़ों की मौजूदगी महज़ मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा है और सशस्त्र बल पूरी तरह तैयार हैं तथा दुश्मन की सभी गतिविधियों पर नज़र रखे हुए हैं।

मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार, सरदार अहमद वहिदी ने एक बातचीत में इस्लामिक गणराज्य ईरान के ख़िलाफ़ दुश्मनों की धमकियों और सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे युद्ध-संबंधी माहौल पर कहा कि दुश्मन युद्ध का वातावरण थोपना चाहते हैं और यह उनकी मनोवैज्ञानिक युद्ध रणनीति का हिस्सा है। इसलिए हमें इस जाल में नहीं फँसना चाहिए और देश की गतिविधियाँ किसी भी हाल में इन मनोवैज्ञानिक अभियानों से प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक बेड़ों की मौजूदगी पर कहा कि यह कोई नई बात नहीं है और इसे भी दुश्मन का मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन माना जाना चाहिए, जिस पर ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है। 12-दिवसीय थोपी गई जंग के बाद सशस्त्र बलों की तैयारी के बारे में उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों की तैयारियाँ अत्यंत उच्च स्तर पर हैं और 12-दिवसीय पवित्र रक्षा काल से भी कहीं अधिक मज़बूत हैं। साथ ही दुश्मनों की सभी गतिविधियाँ पूरी तरह हमारे नियंत्रण और निगरानी में हैं।

अंत में सरदार वहीदी ने कहा कि यह बहुत कम संभावना है कि दुश्मन फिर से कोई मूर्खता करें और पहले से परखे हुए रास्ते को दोहराएँ। वे पहले की साज़िशों और अशांति में अपनी हार देख चुके हैं। इसलिए इन मनोवैज्ञानिक प्रचारों से ऊपर उठकर देश के सभी क्षेत्रों में काम पूरी ताक़त और बेहतर ढंग से आगे बढ़ना चाहिए।

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