पीकेके के शिविरों पर क़ब्ज़े के लिए उत्तरी इराक़ में तुर्की की सेना आगे बढ़ी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तुर्की की सेना की कुछ इकाइयाँ उत्तरी इराक़ के दुहोक प्रांत में कारे और मतीन पहाड़ों की ओर आगे बढ़ रही हैं। बताया जा रहा है कि इसका उद्देश्य इस क्षेत्र में स्थित कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) के ठिकानों और शिविरों को अपने नियंत्रण में लेना है।
फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी के अंतरराष्ट्रीय समूह के अनुसार, मीडिया सूत्रों ने बताया है कि तुर्की की सेना की कुछ इकाइयाँ उत्तरी इराक़ के दुहोक प्रांत के भीतर कारे और मतीन पहाड़ों की ओर बढ़ रही हैं।
सुलेमानिया में «अल-मयादीन प्लस» के संवाददाता ने बताया कि इस सैन्य गतिविधि का कारण पीकेके के निरस्त्रीकरण और उसके लड़ाकों की वापसी के बाद उसके ठिकानों और शिविरों को तुर्की के हवाले किया जाना है। रिपोर्ट के अनुसार, यह गतिविधि पीकेके के नेता अब्दुल्ला ओजलान और तुर्की सरकार के बीच हुए एक समझौते के तहत की जा रही है।
इससे पहले, इसी सितंबर महीने में सुलेमानिया में «अल-मयादीन प्लस» के संवाददाता ने रिपोर्ट किया था कि तुर्की की ख़ुफ़िया एजेंसी (एमआईटी) इराक़ में «कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी» के हथियार सौंपने की प्रक्रिया की निगरानी करेगी। साथ ही, इराक़ी सीमा सुरक्षा बल और पेशमर्गा बल उन इलाकों में तैनात किए जाएंगे, जिन्हें पीकेके ख़ाली करेगा।
यह गतिविधियाँ ऐसे समय में हो रही हैं जब एक दिन पहले इराक़ के कुर्दिस्तान क्षेत्र के एक सुरक्षा सूत्र ने बताया था कि, इराक़ और तुर्की के बीच तुर्की की सेना को बशीका और ज़िलिकान स्थित दो सैन्य ठिकानों से बाहर निकालने को लेकर एक समझौता हुआ है।
«अल-मयादीन» के अनुसार, इस सुरक्षा सूत्र ने बताया कि समझौते के तहत दोनों ठिकाने इराक़ी सेना को सौंप दिए जाएंगे। हालांकि, कुर्दिस्तान क्षेत्र में स्थित तुर्की के अन्य सैन्य ठिकानों के भविष्य को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
ये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आए हैं जब बग़दाद की आपत्तियों के बावजूद उत्तरी इराक़ में तुर्की की सैन्य मौजूदगी कई वर्षों से बनी हुई है।
अंकारा ने वर्ष 2015 में बशीका सैन्य अड्डा स्थापित किया था। उस समय तुर्की ने कहा था कि इस अड्डे का मुख्य उद्देश्य इराक़ी बलों को प्रशिक्षण देना और «इस्लामिक स्टेट» (आईएस आईएस) के ख़िलाफ़ लड़ाई में सहयोग करना है।
बाद के वर्षों में कुर्दिस्तान क्षेत्र में तुर्की की सैन्य कार्रवाइयाँ और उसकी सैन्य मौजूदगी बढ़ती गई, विशेष रूप से पीकेके के खिलाफ अंकारा के अभियानों के तहत। इन सैन्य अभियानों को इराक़ की ओर से विरोध का सामना करना पड़ा है। बग़दाद की आपत्तियों का मुख्य संबंध इराक़ की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता से रहा है।

