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ट्रंप का दावा, 3 अमेरिकी युद्धपोत होर्मुज़ से सुरक्षित गुज़रे, इज़रायली मीडिया ने होर्मुज़ से भागने का दावा किया

ट्रंप का दावा, 3 अमेरिकी युद्धपोत होर्मुज़ से सुरक्षित गुज़रे, इज़रायली मीडिया ने होर्मुज़ से भागने का दावा किया

 ट्रंप ने अपने सोशल प्लेटफ़ॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा:

“हमारे तीन विश्वस्तरीय युद्धपोत हाल ही में भारी गोलीबारी के बीच सफलतापूर्वक होर्मुज़ जलडमरुमध्य (Strait of Hormuz) से गुज़रे। इन तीनों युद्धपोतों को कोई नुकसान नहीं पहुँचा, लेकिन हमला करने वाली ईरानी ताकतों को भारी क्षति उठानी पड़ी।”

“हमलावर पूरी तरह तबाह कर दिए गए। साथ ही बड़ी संख्या में छोटी नौकाएँ भी नष्ट कर दी गईं, जिनका इस्तेमाल उनकी लगभग निष्क्रिय हो चुकी नौसेना की भरपाई के लिए किया जा रहा था। ये नौकाएँ तेज़ी से और प्रभावी ढंग से समुद्र की गहराइयों में समा गईं।”

“हमारे युद्धपोतों की ओर दागी गई मिसाइलों को आसानी से मार गिराया गया।” “इसके अलावा जो ड्रोन हमारी ओर आए, उन्हें हवा में ही जला दिया गया। वे बेहद खूबसूरती से समुद्र की ओर गिरते दिखाई दिए, मानो कोई पतंगा अपनी ही कब्र पर गिर रहा हो।

“एक सामान्य देश इन युद्धपोतों को बिना रोक-टोक गुजरने देता, लेकिन Iran कोई सामान्य देश नहीं है। “वहाँ पागल लोगों का नेतृत्व है, और अगर उन्हें परमाणु हथियार हासिल करने का अवसर मिला होता, तो वे निश्चित रूप से उसका इस्तेमाल करते। लेकिन उन्हें ऐसा अवसर कभी नहीं मिलेगा।”

हालांकि ट्रंप के दावे के विपरीत इज़रायली मीडिया ने अमेरिकी युद्धपोतों के Strait of Hormuz से भागने का दावा किया है। इज़रायली मीडिया ने दावा किया है कि ईरानी हमले के बाद अमेरिकी युद्धपोत Strait of Hormuz क्षेत्र से पीछे हट गए।

इज़रायली सेना के रेडियो ने भी अमेरिकी युद्धपोत के भागने की पुष्टि की

Israel Defense Forces के रेडियो ने पुष्टि की है कि हमले के बाद अमेरिकी युद्धपोत उस क्षेत्र से हट गए। एक इज़रायली अधिकारी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि Iran और United States दोनों ही टकराव को सीमित दायरे में रखना चाहते हैं और तनाव को और अधिक बढ़ने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं।

अगर ट्रंप और इज़रायली मीडिया के बयान को एक साथ देखा जाए, तो डोनाल्ड ट्रंप के दावों और इज़रायली मीडिया की रिपोर्टों के बीच साफ़ विरोधाभास दिखाई देता है। एक ओर ट्रंप यह दावा कर रहे हैं कि अमेरिकी युद्धपोतों को “कोई नुकसान नहीं पहुँचा”, सभी मिसाइलें और ड्रोन मार गिराए गए, और ईरानी हमलावरों को भारी तबाही का सामना करना पड़ा। उन्होंने इसे अमेरिकी सैन्य शक्ति की बड़ी कामयाबी के रूप में पेश किया।

लेकिन दूसरी ओर, इज़रायली मीडिया और Israel Defense Forces के रेडियो की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि ईरानी हमले के बाद अमेरिकी जहाज़ Strait of Hormuz के क्षेत्र से पीछे हट गए। अगर वास्तव में अमेरिकी जहाज़ पूरी तरह सुरक्षित थे, हमला पूरी तरह विफल कर दिया गया था, और ईरान को भारी नुकसान पहुँचा था, तो फिर पीछे हटने की ज़रूरत क्यों पड़ी?

यही सवाल ट्रंप के दावों पर संदेह पैदा करता है। आलोचक कह सकते हैं कि अगर युद्धपोतों की वापसी हुई, तो यह कम-से-कम इस बात का संकेत है कि हालात उतने आसान और एकतरफ़ा नहीं थे, जितना ट्रंप बयान कर रहे हैं। ऐसे में ट्रंप का बयान वास्तविक स्थिति बताने से ज़्यादा राजनीतिक छवि बनाने और अमेरिकी शक्ति का प्रदर्शन करने वाला बयान प्रतीत होता है।

एक पक्ष “पूर्ण विजय” की बात कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष “रणनीतिक रूप से पीछे हटने” की खबर दे रहा है — और यही विरोधाभास पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े करता है।

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