ट्रंप किसी भी तरह से जीत का दावा नहीं कर सकते: अमेरिकी मीडिया
अमेरिकी मीडिया “एमएस नाउ” की एक विस्तृत रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुआ युद्ध-विराम, वॉशिंगटन के लिए किसी भी रूप में स्पष्ट जीत नहीं माना जा सकता। रिपोर्ट के अनुसार, यह समझौता अधिकतर एक “तनाव कम करने की मजबूरी” जैसा दिखता है, न कि किसी रणनीतिक सफलता का परिणाम।
लेख में बताया गया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध-विराम को अपनी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश करने की कोशिश की और इसे अमेरिकी शक्ति के प्रदर्शन से जोड़ा। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि घटनाओं का क्रम इसके विपरीत संकेत देता है। मंगलवार को ट्रंप के फैसलों और बयानों ने एक सुसंगत रणनीति की बजाय जल्दबाज़ी, दबाव और अस्थिरता को उजागर किया।
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के नेतृत्व को “कमजोर और अस्थिर” बताते हुए कहा गया है कि उनके रुख में अचानक बदलाव ने अमेरिका की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है। खासकर यह सवाल उठाया गया कि सोमवार को उन्होंने ईरान की दस सूत्रीय शांति योजना (जो पाकिस्तान की मध्यस्थता से तैयार हुई थी) को खारिज कर दिया, लेकिन महज़ एक दिन बाद, मंगलवार को उसी प्रस्ताव को बातचीत के लिए “व्यवहारिक आधार” मान लिया।
विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि इस तरह का विरोधाभासी रुख यह दर्शाता है कि अमेरिकी प्रशासन के भीतर स्पष्ट नीति और दिशा की कमी है, जिससे सहयोगी देशों और वैश्विक समुदाय में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
इसके अलावा, ट्रंप द्वारा हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के “पूरी तरह खुल जाने” के दावे पर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जमीनी हकीकत यह है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अब भी ईरान का प्रभाव और नियंत्रण बना हुआ है, ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रपति का यह दावा वास्तविकता से मेल नहीं खाता।
अंत में, लेख निष्कर्ष देता है कि इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिका की वैश्विक छवि को मजबूत करने के बजाय कमजोर किया है, और यह युद्ध-विराम ट्रंप प्रशासन के लिए एक कूटनीतिक जीत नहीं, बल्कि दबाव में लिया गया समझौता अधिक प्रतीत होता है।

